यूरोप इस समय इतिहास की सबसे भयानक गर्मी और लू का सामना कर रहा है. कई देशों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है. आसमान से बरसती इस आग और ‘ओमेगा ब्लॉक’ मौसम के पैटर्न के कारण सैकड़ों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि इस जानलेवा गर्मी से बचने के लिए यूरोप के लोग आसानी से एयर कंडीशनर (AC) भी नहीं खरीद पा रहे हैं. हां, जहां भारत जैसे देशों में एसी एक आम जरूरत है, वहीं यूरोप में सख्त सरकारी नियमों, कड़े कानूनों और ऊंची कीमतों के कारण यह आज भी एक लग्जरी बना हुआ है. आइए जानते हैं कि आखिर क्यों यूरोपीय देशों में एसी खरीदना लोहे के चने चबाने जैसा है.
ओमेगा ब्लॉक का कहर और रिकॉर्ड तोड़ती गर्मी
यूरोप में जून के महीने से ही गर्मी ने रौद्र रूप धारण कर लिया है. फ्रांस के पिसोस में तापमान 44.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो 1947 के बाद का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया. पेरिस, स्पेन, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देशों में भी तापमान 40 डिग्री के पार जा चुका है. इस जानलेवा गर्मी के कारण स्पेन और फ्रांस समेत कई देशों में 280 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. हालात इतने खराब हैं कि ट्रेन की पटरियां फैल रही हैं, स्कूल बंद करने पड़े हैं और पेरिस में शराब पीने पर भी पाबंदी लगा दी गई है ताकि अस्पतालों पर दबाव कम किया जा सके.
सर्दियों के लिए बने घर अब बन रहे हैं भट्टी
इतिहास गवाह है कि यूरोप में हमेशा से मौसम सुहाना या बहुत ठंडा रहा है. वहां के घरों को सर्दियों की भीषण ठंड से बचाने के लिए डिजाइन किया गया है. घरों की दीवारें मोटी होती हैं और वहां सेंट्रलाइज्ड हीटिंग सिस्टम होते हैं ताकि अंदर गर्मी बनी रहे. जब तापमान 26 डिग्री पहुंचता है, तो वहां हीटवेव घोषित कर दी जाती है, जबकि दक्षिण एशिया में इसे बहुत सुहाना मौसम माना जाता है. यूरोप में केवल 20% घरों में ही एसी लगा है. वहां के लोग अब तक पंखों या खिड़की-दरवाजों से मिलने वाली प्राकृतिक हवा (पैसिव कूलिंग) के भरोसे रहते थे, लेकिन जलवायु परिवर्तन ने अब सब कुछ बदल दिया है.
यूरोपीय संघ के सख्त नियम और एफ-गैस रेगुलेशन
यूरोप में एसी की मांग तो बढ़ी है, लेकिन इसे खरीदना बहुत मुश्किल है. इसका सबसे बड़ा कारण साल 2024 में आया यूरोपीय संघ (EU) का संशोधित एफ-गैस रेगुलेशन (F-Gas Regulation) है. यह कानून उन गैसों (जैसे हाइड्रोफ्लोरोकार्बन या HFC) पर भारी टैक्स लगाता है या उन्हें बैन करता है जो ग्लोबल वार्मिंग बढ़ाती हैं. यूरोपीय संघ ने साल 2050 तक एचएफसी गैसों को 95% तक कम करने का लक्ष्य रखा है. इस वजह से बाजार में पुराने और सस्ते एसी मॉडल बिकना बंद हो गए हैं. नए और पर्यावरण के अनुकूल एसी मॉडल बाजार में आ तो रहे हैं, लेकिन उनकी सप्लाई कम और मांग ज्यादा होने के कारण कीमतें आसमान छू रही हैं.
घर के बाहर एसी लगाने पर भी है पाबंदी
नियम सिर्फ गैसों तक ही सीमित नहीं हैं. ब्रिटेन और लंदन जैसे शहरों में अगर आप अपने घर के बाहर एसी का कंप्रेसर या आउटडोर यूनिट लगाना चाहते हैं, तो आपको स्थानीय काउंसिल से मंजूरी लेनी पड़ सकती है. ऐतिहासिक इमारतों या संरक्षण क्षेत्रों में केवल इस आधार पर अर्जी खारिज कर दी जाती है कि बाहर लगा एसी बिल्डिंग की खूबसूरती को खराब कर रहा है. इसके अलावा, अगर आपके एसी की आवाज से पड़ोसी को दिक्कत होती है, तो प्रशासन आपको इसे हटाने या आवाज कम करने का आदेश दे सकता है.
एशियाई कंपनियों की चांदी और पर्यावरण का संकल्प
यूरोपीय देश साल 2050 तक खुद को पूरी तरह से ‘क्लाइमेट न्यूट्रल’ यानी कार्बन मुक्त बनाना चाहते हैं. वे जानते हैं कि अगर बड़े पैमाने पर एसी लगाए गए, तो बिजली की खपत बढ़ेगी और उनका यह सपना टूट जाएगा. हालांकि, इस तपती गर्मी के आगे लोग अब नियमों की परवाह किए बिना एसी खरीद रहे हैं. चूंकि यूरोप में एसी बनाने का कोई पुराना बाजार नहीं है, इसलिए इसका सीधा फायदा एशियाई कंपनियों को मिल रहा है. कोरिया, जापान और चीन के एसी निर्माताओं की बिक्री में भारी उछाल आया है और वे यूरोप में धड़ाधड़ अपनी शिपमेंट भेज रहे हैं.