AK-47 उठाने वाली उंगलियों में अब जुड़वा बेटियों का हाथ,

जयपुर: राजस्थान के सीकर जिले के एक शांत गांव ‘अल्सर’ से निकलकर अपराध की दुनिया की सबसे चर्चित सुर्खियों में शुमार होने वाली अनुराधा चौधरी उर्फ मैडम मिंज की जिंदगी ने एक ऐसा मोड़ लिया है, जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। कभी अत्याधुनिक हथियारों को संभालने वाली अनुराधा के हाथों में अब उनकी दो नन्हीं जुड़वा बेटियों का हाथ है। अपराध की मरुभूमि से निकलकर मातृत्व के इस आंगन तक का यह सफर अनुराधा की जिंदगी का अब तक का सबसे बड़ा यू-टर्न माना जा रहा है।

जब अनुराधा के हाथों में मजबूरी ने थमाई थी बंदूक
मीडिया साक्ष्यों के अनुसार, अनुराधा का बचपन बेहद सामान्य था, जहां मां के निधन के बाद उनके सरकारी कर्मचारी पिता उन्हें प्यार से ‘मिंटू’ बुलाते थे। कंप्यूटर एप्लीकेशन (BCA) की पढ़ाई पूरी करने के बाद अनुराधा ने शेयर बाजार के बिजनेस में कदम रखा। लेकिन एक बिजनेस पार्टनर से मिले 1 करोड़ रुपये के धोखे और भारी कर्ज ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी।

गैंगस्टर आनंदपाल सिंह संपर्क में ऐसे आई अनुराधा
कानूनी और प्रशासनिक मदद न मिलने के बाद सुरक्षा की तलाश में वे गैंगस्टर आनंदपाल सिंह के संपर्क में आईं। पढ़े-लिखी होने के कारण वे आनंदपाल के कानूनी दांव-पेचों को संभालती थीं, हालांकि अनुराधा ने हमेशा कोर्ट और मीडिया के सामने साफ किया है कि उनके बीच केवल एक पेशेवर रिश्ता था।

भाषा, बारूद और फिर जठेड़ी से प्रेम कहानी
आनंदपाल के एनकाउंटर के बाद जब अनुराधा लॉरेंस बिश्नोई गैंग के जरिए हरियाणा के गैंगस्टर संदीप उर्फ काला जठेड़ी से मिलीं, तो जठेड़ी उनकी अनूठी शख्सियत पर दिल हार बैठा। अनुराधा की फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने की शैली और कानून व हथियारों की गहरी समझ ने जठेड़ी को बेहद प्रभावित किया। लंबे समय तक पुलिस से भागने के बाद आखिरकार 2021 में दोनों को गिरफ्तार किया गया।

जेल से बाहर आने के बाद अनुराधा ने जठेड़ी के बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल की।
प्रभावित होकर जठेड़ी ने उनके सामने शादी का प्रस्ताव रखा।
12 मार्च 2024 को दिल्ली के द्वारका में 6 घंटे की भारी सुरक्षा और कस्टडी पैरोल के बीच दोनों की शादी संपन्न हुई।

आईवीएफ तकनीक और मातृत्व की नई सुबह
इस कहानी का सबसे बड़ा और संवेदनशील मोड़ हाल ही में तब आया जब अनुराधा ने दो जुड़वा बेटियों को जन्म दिया। चूंकि पति काला जठेड़ी तिहाड़ जेल में बंद था, इसलिए अनुराधा ने हार नहीं मानी और कोर्ट की बाकायदा अनुमति लेकर आईवीएफ तकनीक का सहारा लिया। बच्चियों के जन्म के बाद दिल्ली की रोहिणी कोर्ट ने पूरी तरह मानवीय आधार पर कस्टडी पैरोल मंजूर की, जिससे काला जठेड़ी भारी पुलिस सुरक्षा के बीच अस्पताल पहुंचा और पहली बार अपनी पत्नी और नवजात जुड़वा बेटियों से मिला।

अब हथियारों की जगह एलएलबी की किताबें
अनुराधा ने अदालतों के सामने यह दृढ़ता से स्पष्ट कर दिया है कि वे अतीत के उस काले पन्ने को पूरी तरह पीछे छोड़ चुकी हैं। अब उनकी उंगलियों में AK-47 जैसे घातक हथियार नहीं, बल्कि एलएलबी कानून की भारी-भरकम किताबें और उनकी बेटियों का भविष्य है। वे अब कानून की पढ़ाई कर रही हैं ताकि भविष्य में अपने पति के मामलों की पूरी तरह से संवैधानिक और कानूनी दायरे में रहकर पैरवी कर सकें। बिना किसी व्यक्तिगत आरोप के, यह बदलाव समाज की मुख्यधारा में लौटने की एक बड़ी और सकारात्मक मिसाल है।