Indian ship in Hormuz: अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम खत्म हो गया. ईरान ने होर्मुज में जहाजों का निशाना बनाया और फिर अमेरिका की ओर से जवाबी हमले के साथ सीजफायर को खत्म कर दिया. इस युद्ध की जड़ में हमेशा से रहने वाला होर्मुज एक बार फिर से जंग का मैदान बना हपआ है. मिसाइलें, ड्रोन जहाजों को निशाना बना रहे हैं. इस खतरे के बीच से भारतीय तिरंगे के साथ ‘नंदा देवी’ जहाज ने होर्मुज को पार कर लिया है. LPG टैंकर नंदा देवी दूसरी बार होर्मुज को पार करने में सफल रहा है.
सबसे बड़ी बात यह है कि ईरान-अमेरिका के बीच सीजफायर टूटने के बाद ने नंदा देवी इकलौता जहाज है, जिसने होर्मुज को पार करवे में सफलता हासिल की है. LPG गैस की लोडिंग के लिए ये जहाज तेजी से कतर के रास लाफान की ओर बढ़ रहा है. जहां से वो LPG गैस की खेप लोड कर भारत की ओर से वापस से बढ़ेगा. ये पहली बार नहीं है, जब नंदा देवी ने होर्मुज के संकट को पार किया है. उससे पहले मार्च में जब संघर्ष चरम पर था, ये पश्चिमी हिस्से में फंसा था, जहां से इसने सुरक्षित निकलने में सफलता हासिल की थी.
होर्मुज के खतरे ने निकला भारतीय जहाज
S&P ग्लोबल कमोडिटीज ATC की रिपोर्ट के मुताबिक 7 जुलाई को को डार्क क्रॉसिंग डेटा में भारी इजाफा देखने को मिला है. सिर्फ एक ही जहाज ओमान कोस्ट की तरफ से पार करते हुए दिखे हैं. युद्ध फिर से शुरू होने के बाद और ईरान की ओर से कमर्शियल जहाजों पर मिलाइल दागे जाने के बाद से होर्मुज के मुहाने पर अटके जहाजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. शिपिंग कंपनियां इस रास्ते पर बढ़ रहे खतरे से डरी हुई है. फिर से अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुए हमले के चलते टैंकर्स इस रास्ते से गुजरने से कतरा रहे हैं.
डार्क ट्रांजिट की संख्या तेजी से बढ़ रही
कार्गो अपने ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम यानी AIS को ऑफ कर, उनकी पहचान छिपाकर होर्मुज को पार करने की कोशिश कर रहे हैं हालांकि AIS के बंद होने से जहाज के लोकेशन से लेकर उसकी गतिविधियों का पता लगाना मुश्किल हो जाता है. इससे समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ जाती है. होर्मुज में डार्क ट्रांजिट के बढ़ने के साथ ही दिन के दौरान होने वाले ट्रांजिट में 36 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिली है.
भारत के लिए अहम रास्ता है होर्मुज
भारत के लिए होर्मुज का रास्ता बेहद अहम है, क्योंकि उसके कच्चे तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी गलियारे से आयात किया जाता है. इस रास्ते पर बढ़ने वाले खतरे का सीधा कनेक्शन भारत की ऊर्जा सप्लाई से है.