लखनऊ. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकरकी सियासी सरगर्मियां अभी से चरम पर पहुंचने लगी हैं. लोकसभा चुनाव 2024 में ‘पीडीए’ पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक के बूते सूबे में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी समाजवादी पार्टी अब इस मोमेंटम को किसी भी कीमत पर कम नहीं होने देना चाहती.
इसी सिलसिले में सपा के गलियारों से एक बेहद बड़ी खबर आ रही है. पार्टी सूत्रों की मानें तो सपा प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आगामी 23 अगस्त से पूरे उत्तर प्रदेश में ‘समाजवादी पीडीए रथ यात्रा’ की शुरुआत करने जा रहे हैं. इस यात्रा का मुख्य मकसद जमीनी स्तर पर जाकर पीडीए कुनबे को एकजुट करना और साल 2027 में लखनऊ की गद्दी पर दोबारा कब्जा जमाना है.
अखिलेश यादव अच्छी तरह जानते हैं कि राजनीति में जो ‘जमीन पर दिखता है, वही बिकता है’. लोकसभा की सफलता के बाद घर बैठने के बजाय वह सीएम योगी की तरह अब हर जिले में घूमकर माहौल बनाना चाह रहे हैं. इसी कड़ी में 23 अगस्त से रथ यात्रा शुरू करना उनकी एक आक्रामक और सोची-समझी रणनीति माना जा रहा है. जानकार मानते हैं कि सीएम योगी आदित्यनाथ और बीजेपी इस यात्रा को बिल्कुल भी हल्के में नहीं लेगी. बीजेपी इसके जवाब में अपनी प्रशासनिक रैलियां, विकास कार्यों के उद्घाटन और ‘पन्ना प्रमुख’ सम्मेलनों को तेज कर दी है.
अखिलेश क्यों होने जा रहे हैं पीडीए रथ पर सवार?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यूपी चुनाव 2027 से पहले अब दोनों बड़े घटक चुनावी मोड में आ गए हैं. कांग्रेस-सपा गठबंधन जहां पीडीए समीकरण के साथ आगे बढ़ रही है, वहीं बीजेपी अपने कोर वोटर्स को और मजबूत करने के लिए एक से बढ़कर एक फैसले ले रही है. अभी हाल ही में प्रदेशश बीजेपी संगठन में वैसे नेताओं और जातियों को स्थान मिला है, जिसको लेकर अखिलेश यादव बड़े-बड़े दावे ठोक रहे हैं. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि अखिलेश यादव अपने राजनीतिक करियर में अबतक कितने रथ पर सवार हुए हैं औऱ उसका हश्र क्या हुआ है?
अखिलेश यादव की साइकिल और रथ यात्राओं का इतिहास और उनके परिणाम
अखिलेश यादव के राजनीतिक करियर में ‘रथ यात्राओं’ का हमेशा से एक खास और बेहद सफल इतिहास रहा है. जब-जब अखिलेश रथ पर सवार हुए हैं, तब-तब यूपी की राजनीति में बड़ा भूचाल आया है.
1. साल 2011-12 (समाजवादी विकास रथ यात्रा): अखिलेश यादव ने तत्कालीन मायावती सरकार के खिलाफ पूरे प्रदेश में साइकिल और रथ यात्रा निकाली थी. इसके बाद हुए चुनाव परिणाम में सपा को पूर्ण बहुमत मिला और अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने.
2. साल 2016-17 (विकास से विजय की ओर): पारिवारिक कलह के बीच अखिलेश ने रथ यात्रा निकाली. लेकिन कांग्रेस के साथ गठबंधन के बावजूद सपा को करारी हार का सामना करना पड़ा और बीजेपी सत्ता में आई.
3. साल 2021-22 (समाजवादी विजय यात्रा): कोरोना काल के बाद अखिलेश ने फिर रथ संभाला. हालांकि सपा सत्ता में नहीं आ सकी, लेकिन उसकी सीटें 47 से बढ़कर 111 हो गईं और वोट प्रतिशत में भारी उछाल आया.