उत्तराखंड मदरसों के मान्यता के कड़े नियम, छात्रों के सुरक्षित भविष्य की व्यवस्था जरूरी

देहरादून। उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि जो मदरसे शिक्षा विभाग से मान्यता लेने के इच्छुक नहीं हैं, उन्हें संचालन बंद करने से पहले वहां अध्ययनरत सभी विद्यार्थियों का किसी अन्य मान्यता प्राप्त अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान में प्रवेश सुनिश्चित करना होगा। प्राधिकरण का कहना है कि सरकार का उद्देश्य किसी मदरसे को जबरन बंद करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी छात्र शिक्षा से वंचित न रहे।

मदरसा बंद करने से पहले ध्ययनरत छात्रों का अन्य संस्थान में होगा दाखिला
प्राधिकरण के अनुसार राज्य सरकार सभी बच्चों को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना चाहती है, ताकि वे भविष्य में डाक्टर, इंजीनियर, शिक्षक और अन्य पेशे में आगे बढ़ सकें। इसी उद्देश्य से अब सभी मदरसों को शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित आधारभूत एवं शैक्षणिक मानकों का पालन करना होगा। पहले विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर से मान्यता प्राप्त करनी होगी, इसके बाद उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण धार्मिक शिक्षा संचालन की अनुमति देगा।

विज्ञान प्रयोगशाला और पुस्तकालय अनिवार्य
प्राधिकरण की नियमावली के अनुसार राज्य के 456 मदरसों को शिक्षा विभाग के निर्धारित मानकों का पालन करना होगा। संस्थान के नाम भूमि होना, प्रत्येक कक्षा का निर्धारित आकार, सभी आठ विषयों के शिक्षक, बीएड एवं टीईटी योग्य शिक्षक, पुस्तकालय तथा जूनियर और सीनियर स्तर के लिए आवश्यक सुविधाएं अनिवार्य होंगी। कक्षा नौ से 12 तक संचालित मदरसों में रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान और जीव विज्ञान की अलग-अलग प्रयोगशालाएं भी स्थापित करनी होंगी।

माध्यमिक स्तर के 54 मदरसों में केवल 99 विद्यार्थी
30 जून तक मदरसा बोर्ड के अधीन संचालित कक्षा नौ से 12 तक के 54 मदरसों में मात्र 99 विद्यार्थी नामांकित मिले। इनमें 30 मदरसों में एक भी छात्र नहीं था, जबकि केवल नौ मदरसों में छात्र संख्या 10 से अधिक थी। शेष 15 मदरसों में 10 से कम विद्यार्थी पाए गए, जो शिक्षा विभाग के निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरते। इसके बावजूद सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी मदरसे को जबरन बंद नहीं किया जाएगा।