नई दिल्ली: नीट परीक्षा विवाद और लगातार बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रह्राद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। शिक्षा मंत्री बनने के बाद प्रह्लाद जोशी का पहला बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने दायित्व और विनम्रता की भावना के साथ यह जिम्मेदारी स्वीकार की है।
प्रह्लाद जोशी ने कहा मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘प्रधानमंत्री ने मुझे एक जिम्मेदारी सौंपी है। मैं इस जिम्मेदारी को कर्तव्य भावना और विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूं।’
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा, ‘प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के पिछले 12 वर्षों में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की गई हैं। पिछले चार-पांच वर्षों में धर्मेंद्र प्रधान ने भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू किया है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में मैं अपनी पूरी क्षमता के साथ अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास करूंगा।’
प्रह्लाद जोशी कौन हैं ?
प्रह्लाद जोशी कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा सीट से सांसद हैं। वह लंबे समय से राजनीति में सक्रिय हैं। उनका जन्म कर्नाटक में 1962 में हुआ था। 2004 से लगातार वह धारवाड़ लोकसभा सीट से सांसद हैं। वर्तमान में वह उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। जबकि इससे पहले वे संसदीय कार्य मंत्री और कोयला एवं खान मंत्री भी रह चुके हैं। भाजपा की कर्नाटक इकाई के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं और संगठन में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
देशभर में कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में नीट पेपर लीक मामले में छात्रों के प्रदर्शनों के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। प्रधान ने कहा कि यह उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का मामला नहीं है और पिछले 10 दिनों में सामने आई घटनाओं को देखकर वह परेशान हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि मेरे युवा साथियों, मैं पिछले 4 दशकों से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहा हूं। मेरा सदैव यह विश्वास रहा है कि एक सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होती है। मैं देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता हूं।
धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे में क्या कहा?
उन्होंने लिखा कि भारत की युवा पीढ़ी के सपनों को साकार करना हम सभी के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन का नैतिक संकल्प रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्र की सेवा करने का जो अवसर मुझे प्राप्त हुआ, उसके लिए मैं प्रधानमंत्री का आभार प्रकट करता हूं। 3 मई को हुई नीट यूजी की परीक्षा में सामने आई अनियमितता पाई गई।
भारत सरकार ने इसको तुरंत संज्ञान में लेते हुए जांच सीबीआई को सौंपी और परीक्षा को रद्द किया और पुनः परीक्षा की तिथि घोषित की गई। इसके साथ ही अगले वर्ष से इस परीक्षा को सीबीटी मोड में करने का निर्णय लिया गया। इस दौरान हमारी प्रमुख प्राथमिकता यह रही कि 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा सुचारू रूप से आयोजित की जाए। इसके लिए सरकार का समग्र दृष्टिकोण के तहत काम किया गया। इसमें भारत सरकार के साथ राज्य सरकार, विशेषकर जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। साथ ही छात्रों, अभिभावक और माता-पिता के सहयोग से 21 जून को यह परीक्षा पूर्ण हुई।