हिमाचल की इन सड़कों पर भूलकर भी न करें लापरवाही, बारिश में कभी भी गिर सकती हैं चट्टानें

कुल्लू: हिमाचल प्रदेश में मानसून के सक्रिय होने के साथ ही पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और चट्टानें गिरने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. भारी बारिश के कारण कई सड़कें संवेदनशील बनी हुई हैं और कुछ स्थानों पर कभी भी पहाड़ खिसकने का खतरा बना रहता है. हाल ही में चंबा और लाहौल-स्पीति जिले के बॉर्डर पर स्थित कडू नाला के पास चट्टान गिरने से टाटा सूमो में सवार 13 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी. इस हादसे के बाद प्रशासन ने भी लोगों से बारिश के दौरान पहाड़ी सड़कों पर अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की है. विशेष रूप से मंडी-कुल्लू, औट-लुहरी और भुंतर-मणिकर्ण मार्ग पर यात्रा करने वालों को मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी लेकर ही सफर करने की सलाह दी गई है.

मंडी-कुल्लू मार्ग पर कई संवेदनशील स्थान

मंडी से कुल्लू तक का राष्ट्रीय राजमार्ग बारिश के मौसम में सबसे अधिक प्रभावित मार्गों में गिना जाता है. पंडोह डैम के आसपास का क्षेत्र, जोगणी माता मंदिर के समीप पहाड़ी और थलोट के झलोगी इलाके में अक्सर भूस्खलन और पत्थर गिरने की घटनाएं होती रहती हैं. हाल के दिनों में भी भारी बारिश के कारण झलोगी के पास मलबा आने से सड़क कुछ समय के लिए बंद करनी पड़ी थी. ऐसे में इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है.

कुल्लू-मनाली फोरलेन पर भी बना रहता है खतरा

जिया से कुल्लू तक बने फोरलेन मार्ग पर करीब पांच ऐसे स्थान चिन्हित किए गए हैं, जहां बारिश के दौरान पहाड़ी से मलबा गिरने की आशंका बनी रहती है. वहीं जिया से मनाली तक लगभग 50 किलोमीटर के सफर में करीब दस संवेदनशील स्थान ऐसे हैं, जहां लगातार बारिश होने पर चट्टानें और मलबा सड़क पर आ सकता है. प्रशासन लोगों से अपील कर रहा है कि तेज बारिश के दौरान इन इलाकों में अनावश्यक यात्रा से बचें.

औट-लुहरी और भुंतर-मणिकर्ण मार्ग भी जोखिम

औट-लुहरी हाईवे-305 पर भी मानसून के दौरान कई स्थानों पर भूस्खलन का खतरा बना रहता है. बंजार और आनी को जोड़ने वाले इस मार्ग पर पहाड़ खिसकने की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं. वहीं भुंतर-मणिकर्ण-बरशैणी सड़क पर आठ से दस ऐसे स्थान हैं, जहां चट्टानें गिरने का खतरा हमेशा बना रहता है. घटीगढ़ क्षेत्र इस मार्ग का सबसे संवेदनशील हिस्सा माना जाता है. पिछले दो वर्षों में यहां चार वाहन पत्थर गिरने की चपेट में आ चुके हैं. इसी वर्ष 18 अप्रैल को अचानक मलबा और चट्टानें गिरने से एक कार क्षतिग्रस्त हो गई थी. हालांकि चालक और यात्री समय रहते बाहर निकल गए थे, जिससे बड़ा हादसा टल गया.

हाल की घटनाएं बढ़ा रहीं चिंता

बारिश के मौसम में लाहौल-स्पीति और कुल्लू जिले में भी कई हादसे सामने आए हैं. अप्रैल में लाहौल घाटी में एक टैक्सी पर चट्टान गिरने से पश्चिम बंगाल के पर्यटक दंपती घायल हो गए थे. वहीं मई में मुलिंग पुल के पास पहाड़ी से गिरे बड़े पत्थर की चपेट में आने के बाद एक कार चंद्रा नदी में जा गिरी, जिसमें चालक गंभीर रूप से घायल हुआ था. लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं इस बात की ओर इशारा करती हैं कि बारिश के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करना अतिरिक्त सतर्कता की मांग करता है.

प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी

जिला कुल्लू आपदा प्रबंधन प्राधिकरण लगातार मौसम और सड़कों की स्थिति की जानकारी मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से साझा कर रहा है. लोगों से कहा गया है कि यात्रा शुरू करने से पहले मौसम का पूर्वानुमान और सड़कों की स्थिति जरूर जांच लें. यदि किसी मार्ग पर भूस्खलन या भारी बारिश की सूचना हो तो यात्रा टालना ही बेहतर रहेगा. प्रशासन ने संवेदनशील स्थानों पर चेतावनी बोर्ड भी लगाए हैं और लोगों से उनका पालन करने की अपील की है.

उपायुक्त कुल्लू अनुराग चंद्र ने कहा, “बारिश के मौसम में कभी भी खड़ी चट्टानों या ढलानों के नीचे वाहन पार्क नहीं करना चाहिए. यदि सफर के दौरान पहाड़ से मिट्टी खिसकने, पेड़ों के टूटने या पत्थरों के टकराने जैसी आवाजें सुनाई दें तो तुरंत सुरक्षित स्थान पर चले जाएं. रात के समय और भारी बारिश के दौरान यात्रा से बचें. साथ ही यात्री अपने वाहन में फर्स्ट एड बॉक्स, टॉर्च, पावर बैंक, पीने का पानी और सूखा भोजन भी रखें. किसी भी आपात स्थिति में लोग 112 या आपदा प्रबंधन हेल्पलाइन 1077 पर संपर्क कर सकते हैं.”

ब्लैक स्पॉट सुधारने में जुटा विभाग

लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता बी.सी. नेगी ने बताया कि विभाग ने ऐसे सभी ब्लैक स्पॉट की पहचान कर ली है, जहां दुर्घटनाओं की आशंका अधिक रहती है. इन स्थानों पर सुरक्षा उपायों के साथ सुधार कार्य भी किए जा रहे हैं. जहां चट्टानें गिरने का खतरा अधिक है, वहां चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं. उन्होंने लोगों से अपील की कि बारिश के मौसम में मौसम और सड़क की स्थिति को ध्यान में रखकर ही यात्रा करें, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके.