राजस्थान: भू-माफियाओं के खिलाफ ईडी की कार्रवाई से पीड़ितों के लिए न्याय की उम्मीद

Jaipur News: पीड़ित मनोज कुमावत ने कहा कि मैंने 2016 में अग्रवाल से प्लॉट खरीदे थे, लेकिन रजिस्ट्री किसी और के नाम पर हो चुकी थी। पुलिस ने महीनों कोई कार्रवाई नहीं की और इस बीच कब्जा हो गया। मुझे फोन पर धमकियां मिल रही हैं। यह एक गिरोह का काम है।

जयपुर में व्यवसायी ज्ञान चंद अग्रवाल और उसके सहयोगियों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हालिया छापामारी ने कथित संपत्ति धोखाधड़ी के पीड़ितों में न्याय की मांग को फिर से जगा दिया है। पीड़ितों का कहना है कि एक साल से अधिक समय पहले अदालती हस्तक्षेप से दर्ज किए गए उनके मामले अभी तक लंबित हैं और कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ED ने 3 और 4 सितंबर को जयपुर में कई स्थानों पर छापामारी की, जो राजस्थान पुलिस द्वारा दर्ज कई FIR पर आधारित थी। इन FIR में अग्रवाल पर निवेशकों को 150 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का आरोप लगाया गया है, जिसमें जाली दस्तावेज तैयार कर एक ही जमीन को कई खरीदारों को बेचने का मामला शामिल है।

ED की छापामारी से जगी उम्मीद
ED की छापामारी ने जयपुर में लैंड फ्रॉड के बड़े मामलों में अग्रवाल और उसके सहयोगियों के खिलाफ खोज अभियान चलाया। यह कार्रवाई राजस्थान पुलिस द्वारा दर्ज FIR पर आधारित थी, जिसमें अग्रवाल पर निवेशकों को 150 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का आरोप है। पीड़ितों ने कहा कि ED की इस कार्रवाई से उन्हें न्याय की उम्मीद जगी है, क्योंकि पुलिस की जांच लंबे समय से ठप पड़ी हुई है। ED अधिकारियों ने बताया कि छापामारी से महत्वपूर्ण सबूत और नई लीड्स मिली हैं, और कुछ गिरफ्तारियां अपरिहार्य हैं। एजेंसी ने निवेशकों को चेतावनी दी है कि अग्रवाल और उसके नेटवर्क द्वारा पेश किए जाने वाले रियल एस्टेट सौदों से दूर रहें।

पीड़ितों की आपबीती और धमकियां
पीड़ितों ने अपनी आपबीती साझा की है। मनोज कुमावत ने बताया कि उन्होंने 2016 में अग्रवाल से प्लॉट खरीदे थे, लेकिन बाद में पता चला कि रजिस्ट्री किसी और के नाम पर हो चुकी है। उन्होंने पुलिस को चेतावनी दी थी कि कोई उनकी जमीन पर कब्जा कर सकता है, लेकिन महीनों तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस बीच, जमीन पर दीवार खड़ी हो गई। पुलिस ने रिपोर्ट तैयार करने का बहाना बनाया, लेकिन कोई जिम्मेदार नहीं ठहराया गया। कुमावत ने कहा कि उन्हें फोन पर बार-बार धमकियां मिल रही हैं और यह एक गिरोह का काम है।

एक अन्य पीड़ित हनुमान चौधरी ने कहा कि उन्होंने 2006 में जमीन खरीदी थी, लेकिन बाद में वह संपत्ति किसी और के नाम पर रजिस्टर हो गई। उन्होंने अदालत के माध्यम से मुहाना पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई, लेकिन पिछले एक साल से कोई प्रगति नहीं हुई। धन्ना लाल चौधरी ने धमकियों का आरोप लगाया और कहा कि अगर उनके नाम पर कोई जाली दस्तावेज हैं, तो उन्हें जेल भेज दें। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनके साथ कुछ होता है, तो ये लोग जिम्मेदार होंगे और सरकार भी जवाबदेह होगी। रामावतार महर्षि ने भी समान चिंताएं जताईं।

ED को मिल रही शिकायतें
ED अधिकारियों ने बताया कि छापामारी के बाद राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली के कई निवेशकों ने एजेंसी से संपर्क किया है। वे अपनी राशि की वसूली और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। एक ED अधिकारी ने कहा कि निवेशकों ने बताया कि कैसे अग्रवाल और उसके सहयोगियों ने आकर्षक सौदों के बहाने उन्हें ठगा। इन बातचीतों से महत्वपूर्ण सबूत और नई लीड्स मिली हैं। अधिकारी ने कहा कि कुछ गिरफ्तारियां अपरिहार्य हैं। एजेंसी ने निवेशकों को अग्रवाल के नेटवर्क से दूर रहने की सलाह दी है।

पुलिस और जांच एजेंसियों की प्रतिक्रिया
वरिष्ठ पुलिस और जांच अधिकारी मामलों की लंबितगी को स्वीकार करते हैं। एडीजी (SOG और ATS) वी के सिंह ने कहा कि लैंड फ्रॉड मामलों की जांच अभी स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) के पास है। उन्होंने कहा कि SOG अपराधियों पर शिकंजा कसेगी। अग्रवाल को SOG ने 2009 में गिरफ्तार किया था। जयपुर साउथ डीसीपी राजरशी राज वर्मा ने बताया कि अग्रवाल के खिलाफ 300 से अधिक FIR दर्ज हैं। ये जांच के अधीन हैं और समय-समय पर उसकी गिरफ्तारी हो चुकी है। ED की कार्रवाई के अलावा इन मामलों में कार्रवाई की जाएगी।

अग्रवाल का आपराधिक इतिहास
नारायण ग्रुप के मालिक ज्ञान चंद अग्रवाल ने कई कंपनियों और एलएलपी के माध्यम से विशाल लैंड बैंक बनाया है। उसके खिलाफ निवेशकों को ठगने, जाली जमीन बिक्री और अवैध कब्जे के आरोप हैं। उसे 2009, 2015 और 2019 में SOG ने गिरफ्तार किया था और जयपुर पुलिस ने खासकर मानसरोवर क्षेत्र में उसके खिलाफ सक्रिय वारंट जारी किए हैं। पुलिस और जांच एजेंसियां मानती हैं कि वह विदेशी शैल कंपनियों का उपयोग कर अवैध कमाई को चैनलाइज करता है और खनन सहित व्यवसाय चलाता है। हाल ही में जयपुर पुलिस ने उसे हिस्ट्री-शीटर घोषित किया है।