छत्तीसगढ़ के बैंकों में पड़ा 706 करोड़ रुपये का खजाना, लेकिन मालिकों का अता-पता नहीं! अब आगे क्या होगा?

रायपुर: छत्तीसगढ़ के बैंकों में 706 करोड़ रुपए से अधिक की रकम लावारिस पड़ी है. यह पैसा 18.31 लाख से अधिक ऐसे खाताधारकों का है जो या तो ‘लापता’ हैं या अपने खातों को भूल चुके हैं. इन पैसों को वापस लौटाने के लिए RBI के निर्देश पर बैंक “आपकी पूंजी आपका अधिकार” अभियान तो चला रहे हैं, लेकिन बैंकों का उदासीन रवैया इस अभियान की धज्जियां उड़ाता नजर आ रहा है. अब स्थिति ऐसी है कि लोगों के करोड़ों रुपये डूबने की कगार पर हैं, क्योंकि बैंकों में उन्हें पर्याप्त जानकारी तक नहीं मिल रही है, जिससे लोग निराश होकर लौट रहे हैं. इस मामले में सबसे बड़े बैंक SBI का प्रदर्शन बेहद खराब है, जो डेढ़ महीने में 10% लक्ष्य को भी पूरा नहीं कर पाया है.

31 दिसंबर है डेडलाइन
राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी (SLBC) की एक रिपोर्ट से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है.

छत्तीसगढ़ में कुल 18.31 लाख खाते इनएक्टिव हैं.
इन निष्क्रिय खातों में लोगों के 706.32 करोड़ रुपए जमा हैं.
राजधानी रायपुर में सर्वाधिक 2.57 लाख खाते निष्क्रिय हैं, जबकि बिलासपुर में 1.73 लाख खाते इनएक्टिव हैं.

RBI के नियम के मुताबिक, बैंकों को 31 दिसम्बर तक इन खाताधारकों को ढूंढकर उनके पैसे वापस करने हैं. अगर 10 सालों तक इन खातों से कोई लेन-देन नहीं होता है, तो यह सारी राशि RBI के शिक्षा और जागरूकता कोष में ट्रांसफर कर दी जाएगी.

SBI का रवैया सबसे सुस्त
इस मामले में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) का प्रदर्शन सबसे धीमा है. एसबीआई के AGM राकेश सिंहा ने बताया कि अकेले SBI में ही 2.50 लाख खाते इनएक्टिव हैं, जिसमें करीब 250 करोड़ की राशि जमा है, लेकिन चिंता की बात यह है कि बैंक अब तक सिर्फ 10% लोगों को ही उनके पैसे लौटा पाया है. जब News18 की टीम ने जमीनी हकीकत जानने के लिए रायपुर की एक SBI शाखा का दौरा किया, तो यहां काउंटर पर योजना से जुड़ी जानकारी का घोर अभाव था. लावारिस जमा राशि के बारे में पूछने पर लोग भटकते नजर आए, जिसे लेकर लोगों में खासी नाराजगी दिखी.

अधिकारियों का कार्रवाई का दावा
मामले को लेकर छत्तीसगढ़ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के AGM मनोज कुमार सिंह ने कहा कि सभी बैंकों को बेहतर व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने आश्वासन दिया कि अगर व्यवस्था में कोई खामी पाई जाती है, तो कठोर कार्रवाई की जाएगी.

किसका कितना पैसा फंसा?
533.59 करोड़ रुपये आम रिटेल खाता धारकों के हैं.
43 करोड़ रुपये से अधिक रकम इंडस्ट्रियल ग्राहकों की है.
108.87 करोड़ रुपये सरकार के पैसे हैं जो निष्क्रिय पड़े हैं.
“आपकी पूंजी आपका अधिकार” अभियान को लेकर राज्य के बैंकों का उदासीन और लचर रवैया अगर ऐसा ही रहा, तो 31 दिसंबर की समय सीमा के बाद लाखों लोगों के करोड़ों रुपये डूब सकते हैं.