फैमिली को ‘अधर में’ छोड़ना रिसॉर्ट को पड़ा भारी, हरियाणा कंज्यूमर फोरम ने लगाया 31,000 रुपये का जुर्माना

Haryana Consumer Forum: हरियाणा की एक उपभोक्ता मामलों से संबंधित संस्था ने मनाली के एक रिसॉर्ट पर सर्विस से संबंधित शिकायतों के मामले में बड़ा जुर्माना लगाया है। संस्था ने पाया कि रिसॉर्ट ने पहले से तय बुकिंग के बावजूद गेस्ट और उनके परिवार के लोगों को रिसॉर्ट में रहने से इनकार कर दिया।

इतना ही नहीं, संस्था ने यह भी कहा कि गेस्ट को केवल प्रीबुकिंग का पैसा वापस करने से उनकी समस्या दूर नहीं हो सकती। इसीलिए रिसॉर्ट मैनेंजमेंट को 20,000 रुपये का भुगतान भी करना होगा। इसे सर्विस सेक्टर में वादे के बावजूद सहज सुविधा ने देने वाले संस्थानों के लिए सख्त फैसला माना जा रहा है।

किसने सुनाया है फैसला?
हरियाणा के गुरुग्राम जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष संजीव जिंदल और सदस्य ज्योति सिवाच और खुशविंदर कौर की पीठ ने शिकायतकर्ता को 11,000 रुपये का मुकदमा खर्च भी देने का आदेश दिया है। उपभोक्ता आयोग की तरफ से 13 जुलाई को कहा गया, “यह भी एक स्वीकृत तथ्य है कि शिकायतकर्ता ने गुरुग्राम से मनाली तक लंबी दूरी तय की और संबंधित रिसॉर्ट के कर्मचारियों द्वारा 10,000 रुपये की राशि लौटाए जाने के बाद उसे अधर में छोड़ दिया गया।

आयोग ने इसे रिजॉर्ट के कर्मचारियों से इस स्थिति से निकलने में मदद करने के लिए किए गए उसके अनुरोध पर भी कोई ध्यान नहीं दिया गया, जो इस न्यायालय के विचार में शिकायतकर्ता को काफी मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न का कारण बना।”

आयोग ने आदेश में कहा कि हिमाचल प्रदेश के रिसॉर्ट द्वारा प्रदान की गई अपर्याप्त सेवाओं के कारण शिकायतकर्ता को न केवल मानसिक उत्पीड़न, पीड़ा और दर्द से गुजरना पड़ा, बल्कि उसे वर्तमान अनुचित और अनावश्यक मुकदमेबाजी में घसीटने के लिए भी मजबूर होना पड़ा।

बुकिंग के बावजूद नहीं दी रुकने की अनुमति
बता दें कि यह विवाद तब हुआ था कि जब एक व्यक्ति और द एल्योर ग्रैंड रिसॉर्ट ने 15 मार्च, 2021 को एक पिछली उपभोक्ता शिकायत का निपटारा किया था। समझौते के तहत रिसॉर्ट ने अंतिम निपटारे के रूप में उस व्यक्ति को 40 प्रतिशत छूट पर चार रातों के लिए एक समान कमरा बुक करने की अनुमति देने पर सहमति व्यक्त की।

इस मामले में रिसॉर्ट ने तर्क दिया कि उसने 10,000 रुपये का प्री बुकिंग वाला पैसा वापस कर दिया। जब रिफंड मिल गया था तो फिर शिकायतकर्ता को वैकल्पिक आवास की व्यवस्था कर लेनी चाहिए थी। रिसॉर्ट के अनुसार, उसके कर्मचारियों ने द्वारा शिकायतकर्ता को दूसरा आवास खोजने के लिए सहायता करने से इनकार करना सर्विस में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं है।

आयोग ने रिसॉर्ट के तर्कों पर क्या कहा?
आयोग ने पाया कि रिसॉर्ट ने पिछली उपभोक्ता शिकायत में 15 मार्च, 2021 को हुए समझौते का पालन नहीं किया। वहीं रिसॉर्ट द्वारा दिए गए बचाव किए गए इन विचारों को खारिज कर दिया। आयोग ने यह भी माना कि केवल रिफंड कर देना सर्विस की कमी को दूर नहीं करता। आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि रिसॉर्ट की दोषपूर्ण सेवाओं के कारण शिकायतकर्ता को अनावश्यक परेशानी हुई और उसे अनावश्यक मुकदमेबाजी करनी पड़ी। इसके चलते ही वह मुआवजे और मुकदमेबाजी के खर्चों का हकदार है।

अदालत ने शिकायत को स्वीकार करते हुए रिसॉर्ट को मानसिक उत्पीड़न, पीड़ा और कष्ट के मुआवजे के रूप में 20,000 रुपये और मुकदमेबाजी खर्च के लिए 11,000 रुपये 45 दिनों के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया। अगर रिसॉर्ट की तरफ से ये भुगतान नहीं किया जाता है तो फिर राशि की वसूली होने तक 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लगेगा। यह फैसला इस बात को पुष्ट करता है कि वादे के मुताबिक सेवाएं न देने पर अग्रिम भुगतान वापस करके व्यवसाय अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकते।