मुजफ्फरनगर। पुलिस ने ऋण दिलाने के नाम पर महिलाओं व ग्रामीणों से बैंक खाता लेने वाले गिरोह का राजफाश किया है। आरोपित महिलाओं के साथ ग्रामीणों को तीन हजार रुपये देकर उनका खाता लेते थे। इन बैंक खातों को साइबर ठगी में प्रयोग करते थे। 70 से अधिक म्यूल बैंक खातों में डेढ़ करोड़ रुपये का लेन-देन मिला है। दोस्तों ने आपस में मिलकर छह माह पूर्व गिरोह बनाया था। इनके पास से मोबाइल, एटीएम कार्ड, पासबुक और कार बरामद हुई है।
गुरुवार को एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने पत्रकार वार्ता में बताया कि सिविल लाइंस थाने पर भोपा के गांव सीकरी निवासी महिला फरजाना ने धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें बताया था कि भारत फाइनेंस कंपनी पर बागपत के निरपुणा गांव का बादल राणा और उसके साथी वाजिदपुर का शुभम उर्फ आर्यन तोमर ने उसके ऋण की किस्त भरने का झांसा देकर बैंक खाता लिया था।
संदिग्ध लेन-देन होने पर बैंक ने किया फ्रीज
इस खाते में संदिग्ध लेन-देन होने पर बैंक ने इसे फ्रीज कर दिया। शिकायत के आधार पर सिविल लाइंस पुलिस और साइबर थाना पुलिस ने गहनता से जांच की। उसके बाद आरोपित आर्यन तोमर उर्फ शुभम, बादल राणा, इनके साथी रामपुर गांव के आशु त्यागी और अमरोहा के मलकपुर गांव के नवनीत त्यागी को माल रोड से गिरफ्तार किया गया।
इनके पास से सात एटीएम कार्ड, आठ मोबाइल, पैन व आधार कार्ड समेत बैंक की पासबुक बरामद हुई। आरोपित महिलाओं और ग्रामीणों को ऋण दिलाने का झांसा देकर उनके बैंक खाते लेते थे। एक खाते की एवज में खाताधारक को तीन हजार रुपये देते थे। उसके बाद उनकी पासबुक और एटीएम कार्ड को अपने पास रखते थे। एसएसपी ने बताया कि ये लोग उन खातों को साइबर ठगों को दे देते थे। खातों की जांच के बाद उनमें डेढ़ करोड़ रुपये का लेन-देन मिला है।
आरोपित आशु त्यागी ने लगभग 42 बैंक खाते साइबर ठगों को दिए थे। उसे एक खाता देने पर 10 हजार रुपये मिलते थे। आर्यन और बादल ने छह से अधिक खाते दिए थे। 70 से अधिक बैंक खातों को जांचा गया है। नवनीत त्यागी को आरोपितों ने अपने साथ लगभग दो माह पहले जोड़ा था। बैंक खातों में आई रकम को एटीएम से निकालकर दिल्ली में एक व्यक्ति के माध्यम से क्रिप्टो करंसी, अमेरिकी डालर में परिवर्तित कराया जाता था।