बैंक में सिर्फ 5 हजार, न जमीन ना जायदाद…बिहार चुनाव में सबसे गरीब उम्मीदवार ने जीता सबका दिल

बिहार विधानसभा चुनाव का माहौल पूरे उफान पर है. कहीं बड़े-बड़े नेताओं के रोड शो हो रहे हैं, तो कहीं करोड़ों की गाड़ियों का काफिला निकल रहा है. लेकिन इन सबके बीच एक ऐसा चेहरा भी है जो चुनाव में चर्चा का असली विषय बन गया है. ये हैं आरा विधानसभा सीट से महागठबंधन के भाकपा-माले (CPI-ML) उम्मीदवार कयामुद्दीन अंसारी. लोग इन्हें सबसे गरीब उम्मीदवार कह रहे हैं.

कयामुद्दीन अंसारी की उम्र 50 साल है और वो आरा के एमएचडी जैन कॉलेज से उर्दू में एमए कर चुके हैं. जाति से अंसारी (जुलाहा) हैं. यानी अति पिछड़ा वर्ग से आते हैं. उन्होंने अब तक दो बार आरा विधानसभा से चुनाव लड़ा है. पिछले चुनाव में 2020 में वे भाजपा के अमरेन्द्र प्रताप सिंह से सिर्फ 3,002 वोटों से हार गए थे. उस वक्त उनका संघर्ष पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया था.

कोई जमीन जायदाद नहीं…
इस बार भी वे पूरी उम्मीद के साथ चुनाव मैदान में हैं. लेकिन हालात बहुत अलग हैं. उनके पास न कोई जमीन है, न कोई कारोबार. उनकी पत्नी खुशबु जहां एक आंगनबाड़ी सेविका हैं. और यही उनके परिवार की एकमात्र रेगुलर इनकम है. कयामुद्दीन ने अपने हलफनामे में अपनी आय जीरो दिखाई है. उनके पास सिर्फ 20 हजार रुपये नकद हैं. और बैंक में मात्र 5 हजार रुपये. वो एक छोटे से घर में रहते हैं, जो उनकी सादगी की पहचान बन चुका है.

कयामुद्दीन अपने प्रचार के लिए गांव-गांव घूमकर चंदा इकट्ठा करते हैं. कोई 50 रुपये देता है, कोई 100. इसी पैसे से वो पोस्टर छपवाते हैं और साइकिल पर बैठकर इलाके की गलियों में घर-घर जा रहे हैं. लोग उन्हें देखते हैं, गले लगाते हैं और कहते हैं… “हमारे बीच से निकले हैं, इसलिए हमारी आवाज भी वही उठाएंगे.”

भले ही मैदान में उनके सामने बीजेपी के संजय सिंह टाइगर और जन सुराज के डॉ. विजय कुमार गुप्ता जैसे बड़े उम्मीदवार हैं, लेकिन कयामुद्दीन की सादगी और ईमानदारी लोगों के दिलों में जगह बना रही है. चुनाव के इस शोर में जहां करोड़ों की संपत्ति वाले नेता अपनी ताकत दिखा रहे हैं, वहीं कयामुद्दीन अंसारी जैसे उम्मीदवार उम्मीद की एक नई कहानी लिख रहे हैं. उनकी साइकिल भले धीमी चले, लेकिन जनता के दिलों तक जरूर पहुंच रही है.