मुजफ्फरपुर: कांग्रेस नेता राहुल गांधी बिहार चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए अपने बयानों को लेकर कानूनी मुश्किल में फंस गए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोक आस्था के महापर्व छठ पर की गई कथित अमर्यादित टिप्पणी को लेकर मुजफ्फरपुर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) की कोर्ट में उनके खिलाफ एक परिवाद दर्ज कराया गया है. यह मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है.
क्या है पूरा मामला?
यह परिवाद मुजफ्फरपुर के प्रसिद्ध अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा ने दायर किया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी ने बुधवार को सकरा विधानसभा क्षेत्र में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया. आरोप के मुताबिक, राहुल गांधी ने कहा था कि “पीएम मोदी वोट के लिए स्टेज पर नाच भी लेंगे.
परिवाद में यह भी आरोप लगाया गया
इसके अलावा, परिवाद में यह भी आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी ने छठ पर्व को लेकर “ड्रामा” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया. जिससे करोड़ों हिंदुओं और बिहारवासियों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं. अधिवक्ता ओझा ने इसे भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 298, 356(2), 352 और 353 के तहत एक दंडनीय अपराध बताया है.
11 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
CJM कोर्ट ने इस परिवाद को स्वीकार कर लिया है और मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 नवंबर, 2025 की तारीख तय की है. इस मामले ने बिहार की चुनावी सरगर्मी को और बढ़ा दिया है. एक तरफ जहां कांग्रेस और महागठबंधन इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहे हैं, वहीं भाजपा और एनडीए इसे बिहार की अस्मिता और प्रधानमंत्री के सम्मान से जोड़कर मुद्दा बना रहे हैं.
राहुल गांधी की कितनी बढ़ेगी मुश्किलें
यह पहली बार नहीं है जब सुधीर कुमार ओझा ने किसी बड़े राजनेता के खिलाफ परिवाद दायर किया है. वह अक्सर सार्वजनिक बयानों को लेकर नेताओं को अदालत में घसीटते रहे हैं. अब देखना यह होगा कि अदालत इस मामले में क्या रुख अपनाती है और राहुल गांधी की मुश्किलें कितनी बढ़ती हैं. इस घटना ने बिहार चुनाव में बयानों की मर्यादा और राजनीतिक हमलों के स्तर पर एक नई बहस छेड़ दी है.