पूजा-पाठ करना भगवान से जुड़ने, उनके करीब जाने का उत्त्म जरिया है. पूजा-पाठ करने से सकारात्मकता मिलती है, व्यक्ति धर्मपूर्वक आचरण करने के लिए प्रेरित होता है. देवी-देवताओं की कृपा से उसके काम सफल होते हैं. जीवन में धन-समृद्धि और खुशहाली आती है. वहीं पूजा में गलतियां करने से बचना भी जरूरी है, वरना उसका नकारात्मक असर जीवन पर पड़ता है. आमतौर पर लोग पूजा के बाद बची हुई राख को लेकर भी गलतियां कर बैठते हैं, जो उन्हें भारी नुकसान पहुंचाती हैं.
पूजा की राख
पूजा करना पवित्र कार्य है और पूजा के बाद उसकी बची हुए सामग्री का सही और पवित्र तरीके से निस्तारण करना भी उतना ही जरूरी है. वरना पूजा भी निष्फल जाती है, साथ ही भगवान भी नाराज हो सकते हैं. लिहाजा ये गलतियां ना करें.
– कभी भी दीपक, अगरबत्ती, धूप या हवन सामग्री की बची हुई राख को बेकार समझकर कूड़े में ना फेंकें. ना ही इसे कहीं भी अशुद्ध स्थान पर फेंके. वरना दुर्भाग्य पीछे पड़ जाएगा. घर की सकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है. जिससे तनाव, तंगी बढ़ती है. बनते हुए काम रुकते हैं.
– ना ही मंदिर में या भगवान के सामने राख पड़ी रहने दें. इससे घर में नकारात्मकता बढ़ती है. हमेशा पूजा के कुछ देर बाद राख आदि हटा दें और भगवान के सामने हमेशा साफ-सफाई रखें.
पूजा की राख का क्या करें?
– पूजा की राख का सही तरीके से निस्तारण करना बहुत जरूरी है. बल्कि एक जगह पर राख इकट्ठी करते जाएं, फिर हफ्ते या महीने बाद बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें.
– कई मंदिरों में पूजा के बाद की सामग्री – जैसे सूखे फूल, राख आदि निर्माल्य के लिए पात्र रखे हाते हैं. आप उनमें निर्माल्य डाल दें. मंदिर वाले उसका सही तरीके से निस्तारण कर देते हैं.
– राख आदि को साफ कपड़े में बांधकर घर के बाहर किसी शांत और पवित्र स्थान पर गाड़ दें. यह तरीका भी शास्त्र सम्मत माना जाता है.
– इसके अलावा बगीचे या गमलों की मिट्टी में राख मिला दें. लेकिन ध्यान रखें कि ऐसी जगह ना डालें कि किसी का पैर पड़े.