हिमाचल में 4 फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स में पाई गई अनियमितता, अब एक्शन की तैयारी

शिमला: हिमाचल प्रदेश पुलिस और औषधि विभाग ने प्रदेश में प्रतिबंधित दवाओं के अवैध निर्माण और तस्करी पर रोक लगाने के लिए अभियान चलाया हुआ है. इसी कड़ी में आज दोनों विभाग ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए प्रदेश भर में स्थायी/अस्थायी रूप से निलंबित और समर्पित लाइसेंस वाली 20 दवा निर्माण इकाइयों (Pharmaceutical Manufacturing Units) का निरीक्षण किया. इस दौरान टीम ने कई दवा निर्माण इकाइयों में अनियमितताएं पाई.

यह अभियान हिमाचल पुलिस और ड्रग इंस्पेक्टरों के सहयोग से पारदर्शी और व्यवस्थित रूप से संचालित किया गया. इस दौरान टीम ने फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के लाइसेंस की पुष्टि, दस्तावेजों की जांच, स्टॉक ऑडिट व भौतिक निरीक्षण किया. साथ ही सभी गोदामों व निर्माण क्षेत्रों की गहन तलाशी ली गई. यह पहल नकली दवाओं, बिना लाइसेंस वाली दवाओं और मनो-संवेदी पदार्थों (psychoactive substances) के अवैध निर्माण को रोकने के उद्देश्य से की गई.

पुलिस विभाग के प्रवक्ता ने बताया, ‘हाल की खुफिया सूचनाओं के मुताबिक कुछ बंद या निष्क्रिय दवा निर्माण इकाइयों में गुप्त रूप से अवैध दवाओं का निर्माण करने, जिसमें नकली दवाओं, फेक ब्रांडेड दवाओं और मनो-संवेदी पदार्थ का दुरुपयोग किए जाने का अंदेशा है. ऐसे में इस निरीक्षण अभियान के अंतर्गत स्थायी या अस्थायी रूप से निलंबित और समर्पित लाइसेंस वाली दवा निर्माण इकाइयों में आज निरीक्षण किया गया’.

4 दवा निर्माण इकाइयों में पाई गई अनियमितताएं

उन्होंने बताया कि इस दौरान प्रदेश के 6 जिलों ऊना में 2, बिलासपुर में 2, सोलन में 4, सिरमौर में 1, पुलिस जिला नूरपुर में 1 और पुलिस जिला बद्दी में 10 इकाइयों में निरीक्षण किया गया. इसके अतिरिक्त 5 अन्य दवा निर्माण इकाइयों में निरीक्षण जारी है. इस विशेष अभियान के दौरान 4 दवा निर्माण इकाइयों में अनियमितताएं पाई गईं. इन इकाइयों के खिलाफ नियमानुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है. हिमाचल प्रदेश पुलिस नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सख्ती से कार्रवाई कर रही है. वहीं, दवा निर्माण इकाइयों में किसी भी प्रकार के दुरुपयोग, अवैध निर्माण या अवैध तस्करी को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं.