मॉस्को: रूस और यूक्रेन के बीच शांति समझौते पर सहमति नहीं बन पा रही है. एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की इज्जत इस पीस डील पर टिकी हुई है, दूसरी तरफ पुतिन की जिद से पूरा यूरोप कांप रहा है. अमेरिका ने मजबूरी में पहले यूक्रेन पर ‘आत्मसम्मान’ गंवाने का प्रेशर डाला और उससे भी बात नहीं बनी तो अब रूस पर दवाब डालने की प्लानिंग कर ली है. बताया जा रहा है कि ट्रंप ने पुतिन को बड़ा झटका देने का फैसला कर लिया है और इसके लिए रूस की नब्ज ‘तेल और गैस’ पर सीधा अटैक किया जाएगा.
पुतिन के खिलाफ क्या प्लानिंग कर रहे ट्रंप?
पुतिन ने ट्रंप के साथ जिस शांति समझौते पर सहमती बनाई है, उसमें यूक्रेन के कुछ इलाके मांगे गए हैं. इसमें एक अहम मांग ये थी कि यूक्रेन को नाटो का हिस्सा बनने का सपना भूल जाना पड़ेगा. हाल ही में जेलेंस्की ने नाटो वाली जिद छोड़ दी है. ऐसे में अमेरिका ने तय कर लिया है कि अगर एक बार फिर से पुतिन ने शांति समझौता ठुकराया तो रूस पर पर आर्थिक प्रतिबंधों का ऐसा पहाड़ टूटेगा जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की होगी. ट्रंप मौजूदा फ्रंट लाइन पर युद्ध रोकना और सुरक्षा की गारंटर बनना चाहते हैं लेकिन पुतिन ने जिद पकड़ रखी है कि यूक्रेन का वो हिस्सा रूस के पास ही रहेगा, जिस पर अभी तक कब्जा किया जा चुका है.
अमेरिका तैयार कर रहा नई लिस्ट
अमेरिका इस बार रूस की लाइफलाइन तेल और गैस पर वार करने वाला है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक वाशिंगटन उन ‘शैडो फ्लीट’ (Shadow Fleet) यानी उन संदिग्ध तेल टैंकरों की सूची तैयार कर रहा है जो रूस के तेल को दुनिया भर में चोरी-छिपे पहुंचाते हैं. अगर यह नई लिस्ट जारी हुई, तो रूस के खजाने में आने वाला पैसा पूरी तरह रुक सकता है. अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट यूरोपीय देशों के साथ मिलकर रूस की आर्थिक घेराबंदी को अंतिम रूप दे रहे हैं.
पुतिन का ‘नहले पे दहला’ और ट्रंप की जिद
जहां एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप खुद को ‘शांति दूत’ साबित करने के लिए युद्ध खत्म करवाने के लिए जी-जान से जुटे हैं, वहीं पुतिन ने झुकने से साफ इनकार कर दिया है. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने चेतावनी दी है कि नए प्रतिबंधों से संबंध सुधरने के बजाय और बिगड़ेंगे.
जैसे ही इन प्रतिबंधों की खबर लीक हुई, वैश्विक बाजार में हड़कंप मच गया है. कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में अचानक उछाल देखा गया है. जानकारों का मानना है कि अगर रूस के निर्यात पर लगाम लगी, तो पूरी दुनिया में महंगाई का एक नया तूफान आ सकता है.