ओमान के जिस सुल्‍तान से मिलेंगे पीएम मोदी, 281 साल पुराना है उनकी सल्‍तनत का इतिहास…

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 से 18 दिसंबर तक ओमान दौरे पर हैं. उनके टूर का आज दूसरा दिन है. पीएम मोदी वहां हैथम बिन तारिक से मिलेंगे, जो वहां के वर्तमान सुल्तान हैं. साल 2020 में अपने चचेरे भाई सुल्तान काबूस बिन सईद के निधन के बाद सत्ता में आए थे. ये तो हुई मोदी-हैथम बिन तारिक की बात, लेकिन यहां हम उस सल्तनत के बारे में डिटेल से जानेंगे, जिसका 1774 से लेकर अब तक ओमान पर राज है.आप ये जानकर थोड़ा चौंक सकते हैं कि पीएम मोदी जिस ओमान में हैं वहां करीब 281 सालों से अल सईद राजवंश का राज रहा है, जिसे अब हैथम बिन तारिक आगे बढ़ा रहे हैं. ओमान दुनिया का सबसे पुराना लगातार स्वतंत्र देश रहा है, जिसकी नींव 1744 में अल बु सईद राजवंश ने रखी थी.

कौन थे अल बु सईद, जिन्होंने रखी थी अल सईद राजवंश की नींव
अल सईद राजवंश की नींव रखने वाले अहमद बिन सईद थे, जो पहले सोहार के गवर्नर थे. हुआ यूं कि 1740 के दशक में ओमान गृहयुद्ध की आग में जल रहा था. वहां फारसी सेनाओं का कब्जा भी था. इस मुश्किल वक्त में अहमद बिन सईद ने ओमानियों को एकजुट कर लिया. 1744 में उन्होंने अपनी बुद्धिमानी और सैन्य कौशल के दम पर फारसी सेनाओं को ओमान से बाहर खदेड़ा. सोहार और मस्कट को एक तरह से आजाद कराया. इस बड़ी जीत का नतीजा ये हुआ कि लोगों ने उन पर भरोसा किया और 1744 में उन्हें ओमान का इमाम चुना गया. यहीं से अल बू सईद वंश की नींव पड़ी थी. 1749 में अहमद बिन सईद अल बुसैदी ने इस राजवंश की औपचारिक स्थापना भी की. तब से लेकर अब तक ओमान पर इसी सल्तनत का राज है.

करीब 55 लाख की आबादी वाले ओमान का इतिहास खंगालने पर पता चलता है कि अल बू सईद वंश का शासन जांजीबार की सल्तनत तक फैला था. 19वीं सदी में जांजीबार को राजधानी तक बना दिया गया था, फिर जब ओमान और जांजीबार दोनों अलग-अलग सुल्तनतों में बंट गए, लेकिन दोनों जगह अल बू सईद परिवार के ही सदस्यों ने शासन किया.

अल बू सईद वंश ने अपना साम्राज्य भारतीय महासागर तक फैलाया था. 18वीं और 19वीं सदी में ओमान ईरान का तट, पाकिस्तान का मकरान तट और भारत के साथ व्यापारिक संबंधों का प्रमुख केंद्र बन गया. ओमान के जहाज़ मसाले, हाथीदांत, खजूर और अन्य कीमती वस्तुओं के व्यापार में अहम भूमिका निभाते थे. इसी कारण मस्कट उस समय एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापारिक केंद्र के रूप में उभरा था, जो आज ओमान की राजधानी भी है.

1970 में ओमान का उदय हुआ
आधुनिक ओमान का साल 1970 में उदय काबूस बिन सईद की सत्ता में आने के साथ हुआ था. ये वही वक्त था जब ओमान एक पिछड़ा और सीमित सुविधाओं वाला देश था, लेकिन सुल्तान काबूस ने देश की दिशा और दशा बदलने में अहम रोल अदा किया. उन्होंने सबसे पहले देश का नाम ‘मस्कट और ओमान की सल्तनत’ से बदलकर सिर्फ ‘ओमान’ किया. ये बदलाव सिर्फ नाम का नहीं था, बल्कि एक नए और आधुनिक युग की शुरुआत थी, फिर 1970 से लेकर 2020 तक ओमान विकास की पटरी पर आया.

1970 से लेकर 2020 तक ओमान बदल गया
1970 से लेकर 2020 तक ओमान में खासतौर पर शिक्षा पर ध्यान दिया गया. स्कूल-कॉलेज खोले गए. स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर किया गया. पूरे देश में अस्पताल और क्लीनिक बनाए गए. सड़कें और बंदरगाहों का निर्माण हुआ. नतीजा ये हुआ कि ओमान दुनिया से पूरी तरह जुड़ गया. इन सुधारों का नतीजा ये रहा कि ओमान एक आधुनिक और समृद्ध देश बन गया, उसने इंटरनेशनल लेवल पर एक शांतिप्रिय और संतुलित नीति अपनाई, जिसने उसे दुनिया में एक भरोसेमंद और सम्मानित राष्ट्र के रूप में पहचान दिलाई है.

आखिर क्यों ओमान गए हैं पीएम मोदी?
अब लौटते हैं इस बात पर कि आखिर पीएम मोदी ओमान गए क्यों हैं. तो जान लीजिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ओमान के 2 दिन के दौरे पर इसलिए गए हैं, क्योंकि भारत-ओमान अपने आपसी रिश्तों को और मजबूत करना चाहते हैं.उनका टूर ऐसे वक्त में हो रहा है जब दोनों के राजनयिक संबंधों को 70 साल पूरे हो रहे हैं. यही वजह है कि इस दौरे का खास महत्व है. वो वहां ओमान के सुल्तान Haitham bin Tariq से द्विपक्षीय बातचीत करेंगे. दोनों देशों के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर होने की पूरी उम्मीद है. ये वही समझौता है, जिसके तहत भारत के टेक्सटाइल, फुटवियर, ऑटोमोबाइल, जेम्स एंड ज्वैलरी, रिन्यूएबल एनर्जी और ऑटो कंपोनेंट्स जैसे क्षेत्रों को फायदा मिलेगा. आसान शब्दों में कहें तो पीएम मोदी का यह दौरा व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग को नई ऊंचाई देने के लिए रखा गया है.