Commonwealth Bank of Australia: ऑस्ट्रेलिया से एक चौंकाने वाली कहानी सामने आई है. कैथरीन सुलिवन नाम की महिला ने 25 साल तक ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े बैंक कॉमनवेल्थ बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (CBA) में काम किया. लेकिन हैरानी की बात यह रही कि जिस चैटबॉट को उन्होंने खुद ट्रेन किया, उसी ने उनकी नौकरी छीन ली. जुलाई में उन्हें और उनके साथ काम करने वाले 44 अन्य कर्मचारियों को अचानक हटा दिया गया. यह पहली बार था जब बैंक में AI टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के कारण सीधे तौर पर छंटनी हुई.
कैथरीन का काम था बैंक के AI चैटबॉट Bumblebee के लिए स्क्रिप्ट तैयार करना और उसके जवाब टेस्ट करना. उन्हें लगा कि वे सिर्फ तकनीक को बेहतर बना रही हैं. लेकिन धीरे-धीरे वही चैटबॉट इतना स्मार्ट हो गया कि उसने उनका काम पूरी तरह संभाल लिया. और नतीजा यह हुआ कि बैंक ने कैथरीन को ही निकाल दिया.
कैसा था कैथरीन का रिएक्शन?
कैथरीन ने बताया कि जब उन्हें नौकरी से निकाले जाने की खबर मिली तो वे शॉक में थीं. उन्होंने सोचा था कि चैटबॉट ट्रेनिंग खत्म होने के बाद उन्हें किसी दूसरी भूमिका में भेजा जाएगा. लेकिन इसके बजाय बैंक ने कह दिया कि अब उनकी जरूरत नहीं है. कैथरीन ने कहा, “मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि 25 साल की नौकरी के बाद इस तरह निकाला जाऊंगा. अनजाने में, मैंने ही एक चैटबॉट को ट्रेन किया जिसने मेरी नौकरी ले ली.”
क्या AI पर पूरी तरह भरोसा करना सही है?
कैथरीन मानती हैं कि AI का इस्तेमाल जरूरी और फायदेमंद हो सकता है, लेकिन इसके खतरे भी बड़े हैं. उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी को लेकर कुछ नियम और नियंत्रण जरूरी हैं, ताकि न तो कॉपीराइट का उल्लंघन हो और न ही इंसान पूरी तरह मशीनों से रिप्लेस हो जाए.
क्या सिर्फ ऑस्ट्रेलिया में हो रहा है ऐसा?
यह कहानी सिर्फ ऑस्ट्रेलिया की नहीं है. दुनिया भर में कई कंपनियां धीरे-धीरे AI को अपना रही हैं. इसका सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ रहा है जो सालों से मेहनत कर रहे हैं. यह सवाल अब और तेज़ हो गया है कि भविष्य में इंसानी नौकरियों का क्या होगा.
आगे क्या सीख मिलती है इस घटना से?
कैथरीन का अनुभव हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि AI से डरना नहीं चाहिए, लेकिन उससे सावधान ज़रूर रहना चाहिए. कंपनियों और सरकारों को मिलकर ऐसे नियम बनाने होंगे, जिससे टेक्नोलॉजी इंसान की मदद करे, न कि उसकी रोज़ी-रोटी छीन ले.