चंडीगढ़: हरियाणा के स्वयंभू संत रामपाल को पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने स्वयंभू संत रामपाल की आजीवन कारावास की सजा पर रोक लगा दी है। रामपाल को 2014 में पुलिस के साथ हिंसक झड़प के दौरान अपने अनुयायियों की मौत के मामले में दोषी ठहराया गया था। पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति गुरविंदर सिंह गिल और न्यायमूर्ति दीपिंदर सिंह नलवा की पीठ ने कहा कि कुछ विवादास्पद मुद्दे हैं। खासकर यह कि मौत का कारण हत्या है या नहीं। संत रामपाल का मूल नाम रामपाल दास है। वह हरियाणा के सिंचाई विभाग में कनिष्ठ अभियंता (जेई) के रूप में कार्यरत थे। 1995 में उन्होंने कबीर पंथी संप्रदाय का सतलोक आश्रम स्थापित किया।
गवाहों ने नहीं किया समर्थन
बार एंड बेंच की मंगलवार, 2 सितंबर को पारित अदालत के आदेश में कहा गया है कि यहां तक कि मृतक के रिश्तेदार, चश्मदीद गवाहों ने भी अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं किया है और कहा है कि आंसू गैस के गोले दागने के कारण दम घुटने की स्थिति पैदा हुई थी। यह मामला 2014 का है। जब हिसार स्थित संत रामपाल के आश्रम में पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने गई थी और वहाँ झड़पें हुई थीं। इस झड़प में चार महिलाओं और एक बच्चे की मौत हो गई थी, जिससे उस समय व्यापक आक्रोश फैल गया था। इस घटना के बाद, रामपाल को 2018 में एक विशेष अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
हाईकोर्ट में फैसले को दी थी चुनौती
खुद को संत कहने वाले रामपाल ने बाद में दोष सिद्धि को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इसमें आरोप लगाया था कि उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत को बताया गया कि रामपाल इस मामले में 10 साल आठ महीने से ज्यादा जेल में रह चुके हैं।रामपाल को राहत देते हुए अदालत ने कहा है कि स्वयंभू धर्मगुरु की उम्र को ध्यान में रखा है। उन्हें धार्मिक आयोजनों में शामिल न होने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा है कि बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार अदालत ने अपने बयान में कहा कि इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि अपीलकर्ता की आयु आज लगभग 74 वर्ष है। और वह 10 वर्ष, 08 महीने और 21 दिन की लंबी सजा काट चुका है। हम मुख्य अपील के लंबित रहने तक अपीलकर्ता की सजा को निलंबित करने के लिए उपयुक्त पाते हैं।