नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बांग्लादेश में हिंदू युवक की लिंचिंग की निंदा करते हुए बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस सरकार से स्पष्ट शब्दों में कहा है कि हिंसा रोकना उसकी जिम्मेदारी है, अगर पुलिस नहीं रोक पा रही है तो सेना का इस्तेमाल करे, लेकिन हर हाल में हिंसा रुकनी चाहिए। उन्होंने बांग्लादेश की हिंसक घटनाओं के खिलाफ भारत में हो रहे प्रदर्शनों का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रदर्शन अहिंसक भी हो सकते हैं। उन्होंने इस बात की तारीफ की है कि भारत में हो रहे प्रदर्शन में कहीं से भी हिंसा की जानकारी नहीं है, लेकिन बांग्लादेश में इसी के नाम पर बवाल किया जा रहा है।
हिंदू युवक की लिंचिंग पर भड़के थरूर
केरल के तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद ने बांग्लादेश के मैमनसिंह जिले में ईशनिंदा के आरोपों में कट्टरपंथी मुसलमानों की भीड़ द्वारा एक हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की मॉब लिंचिंग और फिर जला देने पर तीखी प्रतिक्रिया दी। इस घटना के विरोध में भारत में हो रहे राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन का भी उन्होंने समर्थन किया और कहा कि विरोध प्रदर्शन करना उनका अधिकार है। थरूर बोले कि ‘भारत में भी कुछ ग्रुप ने जवाबी प्रदर्शन किए हैं। हमारे लोकतंत्र में उनको यह अधिकार है। मुझे नहीं लगता है कि किसी को लगा हो कि यह प्रदर्शन नियंत्रण से बाहर जा रहे हैं। कहीं भी हिंसा नहीं है, कोई लिंचिंग नहीं और निश्चित तौर पर हिंसा की किसी भी कोशिश से हमारी पुलिस निपट लेगी और निपटना चाहिए।’
हिंसा रोकना बांग्लादेश की जिम्मेदारी
थरूर ने कहा कि वह बांग्लादेश से भी ऐसी ही उम्मीद कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘हम देखना चाहते हैं कि बांग्लादेशी भी ऐसा ही करें। उन्हें हिंसा रोकना होगा। बांग्लादेश सरकार की ओर से सिर्फ खेद जताने या निंदा करने से काम नहीं चलेगा। क्योंकि, सरकार के तौर पर सड़कों पर हो रही हिंसा रोकने के लिए कार्रवाई करना, उनकी जिम्मेदारी है। उन्हें हिंसा पर लगाम लगाने की जरूरत है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि सड़कें फिर से शांत हो जाएं और लोग फिर से सुरक्षित महसूस कर सकें।’