जिस इंटरनेशनल सोलर अलायंस को पीएम मोदी ने बनाया, डोनाल्‍ड ट्रंप ने उससे क्‍यों खींचा हाथ?

International Solar Alliance: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने फैसलों से हर किसी को टेंशन में डाल देते हैं. ट्रंप कब कौन सा फैसला ले लें इसका भरोसा नहीं है. अब US ने भारत और फ्रांस के नेतृत्व वाले इंटरनेशनल सोलर अलायंस समेत 66 इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन से अपना नाम वापस ले लिया है. इसमें 35 नॉन-UN ऑर्गनाइजेशन और 31 UN एंटिटी (संयुक्त राष्ट्र इकाई) थे. पीएम मोदी भी सोलर अलांयस को काफी तवज्जो दे रहे हैं. जब उन्होंने इस मुहिम की शुरुआत की तो दुनियाभर में उनकी तारीफ हुई, जानिए सोलर अलांयस है क्या और ये भारत के लिए क्यों खास है?

ट्रंप ने वापस लिया नाम
व्हाइट हाउस के द्वारा एक घोषणा की गई, जिसमें कहा गया कि US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार (लोकल टाइम) को एक मेमोरेंडम पर साइन किए, जिसमें अमेरिका को उन इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन, कन्वेंशन और ट्रीटी से नाम वापस लेने का निर्देश दिया गया है. जिसमें 35 नॉन-UN ऑर्गनाइजेशन और 31 UN एंटिटी से नाम वापस लेने का जिक्र था. नॉन-UN ऑर्गनाइजेशन में भारत और फ्रांस के नेतृत्व वाला इंटरनेशनल सोलर अलायंस, इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) और इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज जैसी मुख्य एनवायरनमेंटल बॉडी शामिल हैं.

हितों के खिलाफ बताया
ट्रंप का यह फैसला सेक्रेटरी ऑफ स्टेट की रिपोर्ट पर विचार करने और अपने कैबिनेट के साथ विचार-विमर्श करने के बाद आया है, जिसमें उन्होंने तय किया कि ऑर्गनाइजेशन को हिस्सा लेना या सपोर्ट देना यूनाइटेड स्टेट्स के हितों के खिलाफ है. यह कदम ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा जनवरी 2025 में COVID-19 महामारी के मिसमैनेजमेंट का हवाला देते हुए वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) से हटने की घोषणा के लगभग एक साल बाद आया है.

इंटरनेशनल सोलर अलायंस क्या है?
इंटरनेशनल सोलर अलायंस एक ऐसा संगठन है जिसे साल 2015 में भारत और फ्रांस के द्वारा शुरू किया गया था. इस संगठन का मुख्य उद्देश्य था कि सौर संसाधनों से भरपूर देशों को एक साथ लाकर सौर ऊर्जा के उपयोग के लिए बढ़ावा देना, ताकि जलवायु परिवर्तन से आसानी के साथ लड़ा जा सके और साथ ही साथ ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. यह प्रोद्योगिकी सौर ऊर्जा की लागत को कम करने और 2030 तक 1 ट्रिलियन डॅालर के निवेश को जुटाने पर केंद्रित है.

कितने देश हैं शामिल
इसमें जितने भी सदस्य देश हैं उन देशों में सौर ऊर्जा के उपयोग के लिए क्षमता विकसित करना है. इस अलांयस की स्थापना 30 नवंबर 2015 को पीएम मोदी और फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने पेरिस में COP21 सम्मेलन में की थी. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इसमें 120 से अधिक देश हैं. पीएम मोदी का भी इसपर काफी ज्यादा फोकस रहा है, ये पीएम के महत्वपूर्ण विजन में से एक है. पीएम की इस मुहिम के लिए दुनियाभर में उन्हें तारीफ भी मिली थी. इस अलांयस में शामिल हुए देश सोलर तकनीक से चलने वाले उपकरणों पर फोकस कर रहे हैं और इसे कैसे बढ़ाया जाए इसके लिए कई तरह के अभियान चला रहे हैं.

कब शामिल हुआ अमेरिका?
साल 2015 में स्थापित इस अलांयस में 2021 में अमेरिका भी जुड़ गया था. अमेरिका का जुड़ना काफी अहम माना जा रहा था. ग्लासगो में क्लाइमेट चेंज पर चर्चा के लिए COP2026 का आयोजन किया गया था जिसमें अमेरिका ने इस संगठन में शामिल होने का ऐलान किया था. इसकी स्थापना के बाद से ही इस अलांयस में समय-समय पर अन्य देश जुड़ते रहे हैं.