शिमला: मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की। इस दौरान कैबिनेट विस्तार, संगठनात्मक नियुक्तियों और निगम-बोर्डों में ताजपोशी को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। दोनों नेताओं के बीच सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल, आगामी रणनीति और लंबित नियुक्तियों पर विस्तार से चर्चा हुई।
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय अध्यक्ष को प्रदेश संगठन की मौजूदा गतिविधियों, जमीनी हालात और पार्टी कार्यक्रमों की जानकारी दी। निगम-बोर्डों, प्राधिकरणों और विभिन्न सरकारी संस्थाओं में खाली पड़े पदों पर नियुक्तियों को लेकर भी मंथन हुआ। कांग्रेस सरकार के गठन को तीन साल पूरे होने के बाद भी मंत्रिमंडल में एक पद रिक्त है, जिसे लेकर लंबे समय से अटकलें लगाई जा रही हैं। इसको लेकर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने खरगे को क्षेत्रीय और जातीय संतुलन के साथ-साथ अनुभव और संगठनात्मक निष्ठा को ध्यान में रखते हुए कुछ नामों से भी अवगत कराया।
सूत्र बताते हैं कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में विनय कुमार की ताजपोशी के बाद विधानसभा उपाध्यक्ष की नियुक्ति भी लंबित है। इस पद को लेकर भी बैठक में विचार-विमर्श हुआ। पार्टी का प्रयास है कि संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर संतुलन साधते हुए सभी रिक्त पदों को भरा जाए, ताकि प्रशासनिक और राजनीतिक फैसलों में गति लाई जा सके।
अनुराग ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान से की भेंट
पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने शुक्रवार को केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से दिल्ली में भेंट कर हिमाचल में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र में सड़कों के निर्माण की मांग रखी। अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि अच्छी सड़कें किसी भी क्षेत्र के विकास का आधार होती हैं। प्रधानमंत्री का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के बिना विकसित भारत का लक्ष्य अधूरा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का मानना है कि सड़क सिर्फ आवाजाही का रास्ता नहीं, बल्कि समृद्धि का मार्ग है और इसी के दृष्टिगत केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वर्ष 2024-25 से 2028-29 की अवधि के लिए पीएमजीएसवाई-चार को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य 62,500 किलोमीटर नई सर्व-मौसम सड़कों का निर्माण करके ग्रामीण संपर्क को बढ़ाना है।इसके लिए कुल 70,125 करोड़ रुपये का वित्तीय व्यय किया जाएगा। 2011 की जनसंख्या के मानदंडों के आधार पर 25 हजार ऐसी ग्रामीण बस्तियों को प्रत्येक मौसम में सड़क संपर्क प्रदान करना है, जो अभी तक सड़क संपर्क से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना का लाभ हिमाचल को भी मिलना चाहिए।