SC के आदेश के बाद अशोक गहलोत का दावा, राजस्थान ने सबसे पहले दिए मुफ्त सैनिटरी पैड

Following the Supreme Court's order, Ashok Gehlot claims that Rajasthan was the first state to provide free sanitary pads.

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट द्वारा मासिक धर्म से जुड़े स्वास्थ्य को जीवन के अधिकार का हिस्सा घोषित किए जाने के बाद, राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दावा किया है कि राजस्थान देश का पहला राज्य था, जिसने महिलाओं और छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराने की पहल की. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल में शुरू की गई ‘उड़ान योजना’ के तहत यह कदम महिलाओं के स्वास्थ्य और सम्मान को ध्यान में रखते हुए उठाया गया था. और पढ़ें

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा कि मासिक धर्म से जुड़ा स्वास्थ्य (Menstrual Health) संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है. इस फैसले के बाद अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने लिखा कि वह सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का स्वागत करते हैं, जिसमें स्कूलों में छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी पैड देने के निर्देश दिए गए हैं.

‘उड़ान योजना’ का किया जिक्र अशोक गहलोत ने कहा कि उनकी पिछली कांग्रेस सरकार ने महिलाओं के स्वास्थ्य और सम्मान को प्राथमिकता देते हुए ‘उड़ान योजना’ (आई एम शक्ति उड़ान योजना) शुरू की थी. उन्होंने कहा- हमें गर्व है कि हमारी सरकार ने इस योजना के तहत राजस्थान को देश का पहला राज्य बनाया, जहां हर पात्र महिला और छात्रा को मुफ्त सैनिटरी नैपकिन दिए गए.’

सुप्रीम कोर्ट का क्या है आदेश? सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन शामिल थे, ने केंद्र सरकार की ‘स्कूल जाने वाली लड़कियों के लिए मासिक धर्म स्वच्छता नीति’ को लागू करने के निर्देश दिए हैं. यह नीति कक्षा 6 से 12 तक की किशोर लड़कियों के लिए है.

स्कूलों को दिए गए अहम निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी स्कूलों में छात्राओं को मुफ्त बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी नैपकिन दिए जाएं. स्कूलों में साफ-सुथरे और काम करने वाले अलग-अलग शौचालय हों. मासिक धर्म के दौरान लड़कियों को किसी भी तरह की परेशानी न हो. कोर्ट का मकसद है कि लड़कियों को पढ़ाई के दौरान स्वास्थ्य, स्वच्छता और सम्मान के साथ रहने का पूरा अधिकार मिले.