लखनऊ: फ्रॉड के एक पुराने मामले में वांछित चल रहे विशेष सुरक्षा वाहिनी के सिपाही को राजस्थान पुलिस ने बिना सूचना के उठा लिया, जिससे अपहरण की अफवाह फैल गई और इलाके में हड़कंप मच गया। घटना गोमतीनगर इलाके की है जहां सिपाही अखिलेश त्रिपाठी को काली स्कॉर्पियो में जबरन बैठाकर ले जाया गया। परिवार ने अपहरण मानकर पुलिस को सूचना दी, लेकिन जांच में सामने आया कि यह राजस्थान पुलिस की कार्रवाई थी।
जानकारी के अनुसार, सिपाही पर 2002 के फ्रॉड केस में 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था और उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी था। गोमतीनगर इंस्पेक्टर ने कहा कि राजस्थान पुलिस ने बिना स्थानीय पुलिस को सूचित किए कार्रवाई की इसलिए उनके खिलाफ कानून संबंधी कदम उठाए जाएंगे।
गोमतीनगर के विकासखंड निवासी अखिलेश त्रिपाठी विशेष सुरक्षा वाहिनी में सिपाही के पद पर तैनात हैं। रविवार सुबह वह अपने बेटों अमोल और अगम के साथ शिव मंदिर में जल चढ़ाने गए थे। लौटते समय ग्वारी गांव के पास सुबह करीब 9 बजे एक व्यक्ति ने उन्हें रोक लिया और बातचीत में उलझाकर काली स्कॉर्पियो के पास ले गया। वहां पहले से खड़े तीन लोगों ने अखिलेश को पकड़ लिया और जबरन गाड़ी में बैठा लिया। बेटों ने शोर मचाकर रोकने की कोशिश की और राहगीरों से मदद मांगी, लेकिन स्कॉर्पियो सवारों ने सभी को चेतावनी देकर भगा दिया। बेटों ने तुरंत मां आराधना त्रिपाठी को सूचना दी, जिन्होंने पुलिस को कॉल किया। इसी बीच सोशल मीडिया पर गोमतीनगर से एक व्यक्ति के अपहरण की खबर वायरल हो गई।
आराधना के मुताबिक, स्कॉर्पियो सवारों ने खुद को पुलिस वाला बताया था। घटना के बाद एक फोन कॉल भी आया, जिसमें कॉलर ने कहा कि अखिलेश को भगा दो, वरना उन्हें उठा लिया जाएगा। पुलिस मौके पर पहुंची और छानबीन शुरू की। इलाके के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज चेक करने पर अपहरण की पुष्टि नहीं हुई, बल्कि राजस्थान पुलिस की गाड़ी होने का संकेत मिला। पुलिस ने सभी थानों को अलर्ट किया और जांच में पता चला कि अखिलेश राजस्थान के गंगापुर थाने में 2002 में दर्ज फ्रॉड केस में वांछित थे। उस समय वह एक फाइनेंस कंपनी में काम करते थे और धोखाधड़ी के आरोप में केस दर्ज हुआ था।
गोमतीनगर इंस्पेक्टर ब्रजेश चन्द्र तिवारी ने बताया कि राजस्थान पुलिस ने प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया है। उन्हें स्थानीय पुलिस को सूचित करना चाहिए था। इसलिए राजस्थान पुलिस को नोटिस भेजा जाएगा और आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी।