जयपुर: राजस्थान में सरकारी नियुक्तियों के पीछे चल रहा फर्जीवाड़े का खेल एक बड़े संगठित अपराध के रूप में सामने आया है। अलवर जिला परिषद की लिपिक भर्ती हो या जालोर में रीट के जरिए बने शिक्षक, जांच की आंच ने व्यवस्था की चूलें हिला दी हैं।
कहीं फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र और कूटरचित दस्तावेजों के सहारे कुर्सियां हथियाई गईं, तो कहीं ‘डमी अभ्यर्थियों’ और फोटो बदलकर परीक्षा दिलाने वाले गिरोह ने सेंधमारी की। एसओजी की गहन पड़ताल और जिला कलेक्टरों की जांच रिपोर्ट के बाद अब तक सैकड़ों सरकारी कार्मिकों पर गाज गिरी है, जिससे यह साफ हो गया है कि प्रदेश में ‘मेरिट’ नहीं बल्कि ‘जालसाजी’ के दम पर सिस्टम में घुसपैठ की कोशिश की गई थी।
लिपिक भर्ती में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं उजागर
जिला परिषद अलवर की साल 2022 की लिपिक भर्ती में बड़े स्तर पर अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच में फर्जी दस्तावेजों, कूटरचित प्रमाणपत्रों तथा भर्ती शाखा के अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत के गंभीर मामले उजागर हुए हैं।
भर्ती प्रक्रिया में नियुक्त लिपिक सीमा गुर्जर का अनुभव प्रमाण पत्र मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद अलवर के फर्जी हस्ताक्षरों से जारी किया गया था। यह प्रमाण पत्र जिला परिषद अलवर की भर्ती शाखा के डिस्पैच रजिस्टर में दर्ज कर उसकी एक प्रति कार्यालय फाइल में भी संलग्न की गई। इस प्रकरण की जांच जिला कलेक्टर की ओर से वर्ष 2025 में की गई, जिसकी रिपोर्ट पंचायती राज विभाग को भेजी गई।
रिपोर्ट के आधार पर नवंबर 2025 में सीमा गुर्जर को सेवा से बर्खास्त करते हुए थाना अरावली विहार, अलवर में मुकदमा दर्ज कराया गया। इसी भर्ती में नियुक्त लिपिक कृष्णा कुमारी शर्मा का कंप्यूटर प्रमाणपत्र भी फर्जी पाया गया। यह तथ्य भी जिला कलेक्टर की जांच रिपोर्ट में प्रमाणित हुआ। नवंबर 2025 में उन्हें भी सेवा से बर्खास्त कर थाना अरावली विहार अलवर में मुकदमा दर्ज कराया गया।