जाते-जाते तीन विधेयक मंजूर कर गए राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल

हिमाचल के पूर्व राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल शिमला से तेलंगाना ट्रांसफर होने से पहले हिमाचल सरकार के तीन विधेयकों को मंजूरी दे गए हैं। इन्होंने सात मार्च, 2026 को अपना अनुमोदन दिया और अब विधि विभाग ने इन विधेयकों को कानून के रूप में नोटिफाई कर दिया है। पहला विधेयक कर्मचारी एक्ट से संबंधित था, जिसमें राज्य सरकार ने अब पूर्व प्रकाशन की शर्त को खत्म कर दिया है। यानी इस एक्ट के अनुसार कोई भी नोटिफिकेशन बिना ड्राफ्ट जारी किए हो सकेगी। पहले पारित किए गए एक्ट में से धारा 10 में संशोधन कर पूर्व प्रकाशन के इस प्रावधान को हटाया गया है। इसे विधानसभा में हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारियों की भर्ती एवं सेवा की शर्तें संशोधन अधिनियम 2025 के रूप में पारित किया गया था। दूसरा विधेयक अटल आयुर्विज्ञान और अनुसंधान विश्वविद्यालय नेरचौक मंडी से संबंधित था।

इसमें धारा 32 का संशोधन कर राज्य सरकार ने वित्त समिति फायनांस सेके्रटरी की अध्यक्षता में गठित की है। यह वित्त समिति ऐसे मामलों पर अपनी सिफारिश सरकार के विचार और अनुमोदन के लिए प्रस्तुत करेगी, जो कर्मचारियों की भर्ती, पदोन्नति, वेतन और भत्तों से संबंधित होगी। तीसरा बिल हिमाचल प्रदेश नगर पालिका द्वितीय संशोधन अधिनियम 2025 के रूप में था। इसमें आईपीसी की जगह बीएनएस की धाराओं को जोड़ा गया है और तीन नए क्रिमिनल लॉ के प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। शहरी निकायों के लिए फाइन की राशि में भी वृद्धि की गई है। पिछले विधानसभा सत्र में इन बिलों को राज्य सरकार ने विधानसभा से पारित किया था और गवर्नर की अनुमोदन के लिए भेजा था। शिमला से तेलंगाना जाने से पहले राज्यपाल इन्हें अनुमोदित कर गए हैं। इसीलिए विधि विभाग ने अब नए कानून के रूप में इन्हें अधिसूचित कर दिया है।