नई दिल्ली/नोएडा: नोएडा के चमकते शीशों वाली फैक्ट्रियों के पीछे का दर्द अचानक सोमवार से सड़कों पर आ गया है. हजारों मजदूर काम छोड़कर बीते दो दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं, पुलिस से झड़प भी हुई, सैकड़ों लोगों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हुआ और अब कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई. लेकिन हवा में एक ही सवाल है जब पड़ोस के गुड़गांव में मजदूरी ज्यादा है, तो नोएडा में हमें कम क्यों?
हालांकि मजदूरों के उग्र प्रदर्शन को देख यूपी सरकार ने मंगलवार को नोएडा और गाज़ियाबाद में मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने का ऐलान कर दिया. लेकिन यह सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा के बीच न्यूनतम मजदूरी की उस खाई की कहानी है, जिसने मजदूरों के चूल्हे ठंडे कर दिए हैं. आइए, समझते हैं कि नोएडा के मजदूर अचानक सड़कों पर क्यों आ गए और क्या हैं न्यूनतम मजदूरी के नियम.
आइए, समझते हैं कि नोएडा के मजदूर अचानक सड़कों पर क्यों आ गए और क्या हैं न्यूनतम मजदूरी के नियम.
मामला क्या है? क्यों भड़की मजदूरों की नाराजगी?
दरअसल, हाल ही में हरियाणा सरकार ने न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी की है. इसके बाद नोएडा की गारमेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों ने भी मोर्चा खोल दिया. मजदूरों का कहना है कि
“गुड़गांव (हरियाणा) में एक अकुशल मजदूर को नोएडा के मुकाबले 30-40 फीसद अधिक वेतन मिल रहा है. नोएडा के कई मजदूरों का आरोप है कि उन्हें महीने के महज 10,000 से 11,000 रुपये दिए जा रहे हैं. मजदूरों का तर्क है कि दिल्ली-NCR में रहने का खर्च समान है, फिर नोएडा में कम पैसे क्यों?”
नोएडा में अभी कितना मिलता है वेतन?
उत्तर प्रदेश सरकार के मौजूदा नियमों के मुताबिक, राज्य में न्यूनतम मजदूरी को तीन श्रेणियों में बांटा गया है. नोएडा में स्थिति कुछ इस प्रकार है. अनुमानित मासिक मजदूरी अकुशल के लिए 10,500-11,000 लगभग 350-400 रुपये प्रतिदिन. अर्ध-कुशल मजदूरों के लिए 11,500 -12,500, कुशल मजदूरों के लिए 13,000 – 14,500 लगभग 500 – 550 प्रतिदिन. मजदूरों का दावा है कि फैक्ट्रियों में उनसे 300-350 दिहाड़ी पर काम लिया जा रहा है, जबकि गाँवों (देहात) में मनरेगा या निजी निर्माण कार्यों में 500-600 रुपये तक मिल जाते हैं.
गुड़गांव (हरियाणा) का उदाहरण क्यों दे रहे हैं मजदूर?
नोएडा के मजदूरों की मांग के पीछे हरियाणा सरकार का वह फैसला है, जिसने दिल्ली-एनसीआर के लेबर मार्केट में हलचल मचा दी है. हरियाणा में अकुशल मजदूर का न्यूनतम वेतन नोएडा के मुकाबले काफी बेहतर है. वहां यह आंकड़ा 13,000 से ऊपर जा चुका है. नोएडा और गुड़गांव के बीच सिर्फ दिल्ली की सीमा है. मजदूरों का कहना है कि जब काम एक जैसा है, कंपनियां एक जैसी हैं और शहर की महंगाई भी एक जैसी है, तो राज्य की सीमा बदलते ही वेतन क्यों गिर जाता है?
हरियाणा में मज़दूरों के लिए बड़ा तोहफ़ा!
बता दें कि 9 अप्रैल को हरियाणा सरकार ने राज्य सरकार ने मज़दूरों को दी जाने वाली न्यूनतम मज़दूरी की दरों में बढ़ोतरी करके उन्हें एक तोहफ़ा दिया है, और यह मज़दूरी बढ़ोतरी 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगी. राज्य में सभी श्रेणियों के मज़दूरों के लिए न्यूनतम मज़दूरी में लगभग 35% की बढ़ोतरी की गई है