महिला आरक्षण पर पीएम मोदी LIVE: परिसीमन में भेदभाव नहीं होगा ये गारंटी

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘ नारी शक्ति वंदन अधिनियम ‘ पर लोकसभा में चर्चा के दौरान कहा कि हम देश को नई दिशा देने जा रहे हैं। ये 21वीं सदी का सबसे अहम बिल है। पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्र के जीवन में कुछ महत्वपूर्ण पल आते हैं, और उस समय की समाज की मन स्थिति और नेतृत्व की क्षमता उस पल को कैप्चर कर एक राष्ट्र की अमानत बना देती हैं। एक मजबूत धरोहर तैयार करती हैं। भारत के संसदीय इतिहास में ये वैसा ही पल है। प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं को मिलने वाले इस अधिकार का जिस-जिसने विरोध किया है, महिलाओं ने उसे माफ नहीं किया है।

पीएम मोदी बोले- इस बिल को राजनीति का रंग न दें
संसद के विशेष सत्र में गुरुवार को हिस्सा लेने के लिए पीएम मोदी लोकसभा में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि आवश्यकता तो ये थी कि 25—30 साल पहले, जब ये विचार सामने आया तभी इसे लागू कर देते। आज हम इसे काफी परिपक्वता तक पहुंचा देते। आवश्यकतानुसार उसमें समय समय पर सुधार होते और यही तो लोकतंत्र की खूबसूरती होती है। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का जिक्र पीएम मोदी ने अपील में कहा कि इस बिल को राजनीतिक रंग न दें।

पीएम मोदी ने लोकसभा में क्या कहा, बड़ी बातें
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हम सभी सांसद इस महत्वपूर्ण अवसर को जाने न दें। हम भारतीय मिलकर देश को नई दिशा देने जा रहे हैं। हमारी शासन व्यवस्था को एक संवेदनशीलता से भरने का एक सार्थक प्रयास करने जा रहे हैं।

पीएम ने कहा कि मुझे विश्वास है कि इस मंथन से जो अमृत निकलेगा, वह देश की राजनीति के रूप-स्वरूप को तय करने के साथ देश की दिशा और दशा भी तय करेगा।

पीएम मोदी ने कहा कि मैं मानता हूं कि विकसित भारत का मतलब, सिर्फ उत्तम प्रकार की रेल, कुछ इंफ्रास्ट्रक्चर, रास्ते या कुछ आर्थिक प्रगति के आंकड़े, सिर्फ इतने से विकसित भारत की सीमित कल्पना वाले हम नहीं हैं। हम चाहते हैं कि विकसित भारत के नीति निर्धारण में सबका साथ—सबका विकास का मंत्र समाहित हो।

पीएम मोदी ने आगे कहा कि देश की 50 प्रतिशत जनसंख्या देश की नीति निर्धारण का हिस्सा बने, ये समय की मांग है। हम पहले ही देरी कर चुके हैं, कारण कुछ भी हो, जिम्मेदार कोई भी हो। इसे हमें स्वीकार करना होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे देश में जब से महिला आरक्षण को लेकर चर्चा हुई और उसके बाद जब-जब चुनाव आया है। महिलाओं को मिलने वाले इस अधिकार का जिस-जिसने विरोध किया है, महिलाओं ने उसे माफ नहीं किया है। 2024 के चुनाव में ऐसा नहीं हुआ, ऐसा इसलिए नहीं हुआ क्योंकि तब सबने सर्वसम्मति से इसे पारित किया तो यह विषय ही नहीं रहा।

पीएम मोदी ने कहा कि आज से 25-30 साल पहले, जिन्होंने महिला आरक्षण का विरोध किया वो विरोध राजनीतिक सतह से नीचे नहीं गया था। आज ऐसा समझने की गलती मत करना। पिछले 25-30 साल में ग्रास रूट लेवल पर पंचायती चुनाव व्यवस्थाओं में जीत कर आईं बहनों में एक पॉलिटिकल कॉन्शियसनेस है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले वो शांत रहती थीं, समझती थीं लेकिन बोलती नहीं थीं। आज वो वोकल हैं। इसलिए आज जो भी पक्ष विपक्ष होगा, वो लाखों बहनें जो पंचायत में प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं, लोगों के सुख-दुख को गहराई से देखा है, वो आंदोलित हैं।

संसद में लाए गए तीन बिल का उद्देश्य क्या है
संविधान संशोधन विधेयक के अनुसार, 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए परिसीमन प्रक्रिया के बाद लोकसभा सीटों की संख्या वर्तमान 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 की जाएगी। यह परिसीमन अंतिम प्रकाशित जनगणना के आधार पर किया जाएगा।

इसके अलावा, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए सीटों की संख्या बढ़ायी जाएगी। लोकसभा सदस्यों को उपलब्ध कराए गए विधेयक में कहा गया है कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में ‘रोटेशन’ के आधार पर आवंटित की जाएंगी।