शिमला: लेंसकार्ट के सह संस्थापर और सीईओ पीयूष बंसल की माफी के बावजूद बिंदी-कलावा विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। अब यह हिमाचल की राजधानी शिमला तक पहुंच गया है। जहां हिंदू संगठनों ने लेंसकार्ट स्टोर के अंदर घुसकर विरोध प्रदर्शन किया। हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने लेंसकार्ट स्टोर के अंदर हनुमान चालीसा का पाठ किया। वहीं स्टोर के अंदर मौजूद कर्मचारियों को तिलक और कलावा भी बांधा। बता दें कि यह पूरा विवाद धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचने के आरोपों के बाद शुरू हुआ था। पीयूस बंसल की ओर से सफाई और माफी दिए जाने के बाद भी हिंदू संगठनों में अभी भी गुस्सा है। कॉर्पोरेट जिहाद के माध्यम से हिंदू भावनाओं को आहत किया जा रहा है और कंपनियां निवेश या अन्य दबावों के चलते पक्षपातपूर्ण नीतियां अपना रही हैं।
जानें पूरा विवाद
लेंसकार्ट के इन हाउस ड्रेस कोड को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर एक पुराना स्टाइल गाइड वायरल हुआ। इस दस्तावेज में हिजाब की अनुमति थी, लेकिन बिंदी, तिलक और टीका जैसे हिंदू धार्मिक प्रतीकों का जिक्र नहीं था।
इसके बाद से ही लगातार मामला बढ़ता जा रहा है।
इसी कड़ी में शिमला के संजौली में लेंसकार्ट शोरूम के बाहर हिंदू संगठनों ने प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने अंदर जाकर कर्मचारियों को तिलक लगाया और कलावा बांधा और हनुमान चालीसा पढ़ी।
प्रदर्शनकारियों ने लगाए यह आरोप
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बड़ी कंपनियां निवेश और दबाव के चलते एक खास विचारधारा को बढ़ावा दे रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर किसी एक धार्मिक प्रतीक को अनुमति दी जाती है तो सभी को समान अधिकार मिलना चाहिए। भेदभाव को लेकर उन्होंने सरकार और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग भी की। प्रदर्शन कर रहे संगठनों का आरोप है कि कॉर्पोरेट जिहाद के नाम पर हिंदू भावनाओं को आहत किया जा रहा है।
एक्स पर लंबी चौड़ी पोस्ट कर दी सफाई
लेंसकार्ट ने एक्स पर एक पोस्ट करते हुए इस मामले में सफाई भी दी थी। हमने आपकी बात स्पष्ट रूप से और खुले दिल से सुनी है। पिछले कुछ दिनों में हमारे समुदाय और ग्राहकों ने अपनी राय रखी। हमने उसे गंभीरता से सुना। आज, हम अपने ‘इन-स्टोर स्टाइल गाइड’ को स्टैंडर्डाइज कर रहे हैं और इसे सार्वजनिक रूप से और पूरी पारदर्शिता के साथ शेयर कर रहे हैं। ये गाइडलाइंस साफ तौर पर और बिना किसी दुविधा के हमारे टीम के सदस्यों द्वारा अपनाए जाने वाले हर धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीक का स्वागत करती हैं। जैसे- बिंदी, तिलक, सिंदूर, कलावा, मंगलसूत्र, कड़ा, हिजाब, पगड़ी, और भी बहुत कुछ। इन्हें अपवाद के तौर पर नहीं, बल्कि हमारी पहचान के तौर पर स्वीकार किया जाता है।