Jaipur News: खेत है… लेकिन रास्ता नहीं. किसानों की ये सबसे बड़ी परेशानी अब खत्म होने वाली है. राजस्थान सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. अब जिन किसानों की जमीन तक पहुंच नहीं है, उन्हें सरकार खुद रास्ता देगी. 20 फीट चौड़ी सरकारी जमीन मिलेगी, सीधे खेत तक कनेक्टिविटी बनेगी… लेकिन इसके लिए चुकानी होगी कीमत भी. क्या हैं नियम, कौन ले सकेगा फायदा और कैसे बदलेगी गांव की तस्वीर. देखिए ये रिपोर्ट.
राजस्थान में अब ऐसे किसानों को बड़ी राहत मिलने जा रही है जिनकी खेती की जमीन तक पहुंचने के लिए कोई सीधा रास्ता नहीं है. राज्य सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए निर्देश जारी किए हैं कि जिन काश्तकारों की जमीन के बीच राजकीय भूमि आ रही है और वे अपने खेत तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, उन्हें रास्ते के लिए सरकारी जमीन आवंटित की जाएगी.
खेती-किसानी के काम को भी सुगम बनाएगा
राजस्व विभाग की ओर से सभी जिला कलेक्टरों को इस संबंध में पत्र जारी किया गया है. नए प्रावधान के तहत किसानों को अधिकतम 20 फीट चौड़ी जमीन की पट्टी दी जाएगी. जिससे वे अपने खेत तक आसानी से पहुंच सकें. यह फैसला उन ग्रामीण इलाकों के लिए खास मायने रखता है, जहां आज भी कई खेत ऐसे हैं, जिन तक पहुंचने के लिए कोई व्यवस्थित मार्ग नहीं है. सरकार का यह कदम न सिर्फ किसानों की दैनिक परेशानियों को कम करेगा बल्कि खेती-किसानी के काम को भी सुगम बनाएगा. कई बार किसानों को अपने खेत तक पहुंचने के लिए दूसरों की जमीन से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे विवाद की स्थिति भी बनती है. अब इस व्यवस्था के बाद ऐसे विवादों में भी कमी आने की उम्मीद है.
किन किसानों को मिलेगा यह फायदा
सरकारी जमीन का यह आवंटन मुफ्त नहीं होगा. इसके लिए किसानों को कृषि भूमि की डीएलसी (डिस्ट्रिक्ट लेवल कमेटी) दर से दोगुनी कीमत चुकानी होगी. हालांकि, यह राशि एक तरह से स्थायी समाधान के बदले में होगी, जिससे किसान बिना किसी बाधा के अपनी जमीन तक पहुंच सकेंगे. सरकार ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि आवंटित की जाने वाली 20 फीट चौड़ी जमीन का उपयोग केवल रास्ते के रूप में ही किया जा सकेगा. इस पर किसी भी तरह का निर्माण या अन्य उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा. इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जमीन का उद्देश्य केवल आवागमन तक ही सीमित रहे. इस सुविधा का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा, जिनकी जमीन तक पहुंचने के लिए कोई अन्य वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध नहीं है.
किसे नहीं मिलेगा फायदा
यदि किसी खातेदार की भूमि पहले से ही किसी राजकीय सड़क या रास्ते से जुड़ी हुई है, तो उसे इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा. साथ ही, खेत और मुख्य रास्ते के बीच राजकीय भूमि का होना भी जरूरी है. इस पूरी प्रक्रिया में जिला कलेक्टर की भूमिका अहम रहेगी. जमीन आवंटन के लिए प्रस्ताव कलेक्टर स्तर पर तैयार किया जाएगा, जो पटवारी और गिरदावर की रिपोर्ट के आधार पर बनेगा. खसरा अनुसार जमीन की पहचान कर उसे चिन्हित किया जाएगा और फिर राज्य सरकार को अंतिम स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा.
बहरहाल, ग्रामीण अर्थव्यवस्था में खेती की अहम भूमिका को देखते हुए यह फैसला किसानों के लिए राहत भरा माना जा रहा है. इससे न केवल खेती तक पहुंच आसान होगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से चले आ रहे रास्ते के विवादों को भी सुलझाने में मदद मिलेगी.