पटनाः बिहार के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक ही नाम की चर्चा सबसे ज्यादा है और वो है आईएएस लोकेश कुमार सिंह. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपनी टीम में इस अनुभवी अधिकारी को शामिल कर साफ कर दिया है कि उनकी सरकार आने वाले दिनों में बिहार के विकास और कार्यशैली को लेकर कितनी गंभीर है. 10 मई, 2026 को हुए बड़े प्रशासनिक फेरबदल के बाद आईएएस लोकेश कुमार सिंह को मुख्यमंत्री सचिवालय में सचिव जैसी ‘सुपर पावर’ वाली जिम्मेदारी सौंपी गई है.
कौन हैं आईएएस लोकेश कुमार सिंह?
लोकेश कुमार सिंह 2003 बैच के बिहार कैडर के आईएएस अधिकारी हैं. मूल रूप से बिहार की मिट्टी से ही ताल्लुक रखने वाले लोकेश कुमार का जन्म 8 मई, 1977 को हुआ था. उन्होंने इतिहास विषय में स्नातक और स्नातकोत्तर (M.A.) की पढ़ाई की है. सरल स्वभाव और काम के प्रति बेहद अनुशासित रहने वाले लोकेश कुमार को भारतीय प्रशासनिक सेवा में करीब 23 वर्षों का लंबा अनुभव है.
जमीनी अनुभव से सचिवालय तक
लोकेश कुमार सिंह का प्रशासनिक सफर जुलाई 2005 में उनकी पहली पोस्टिंग के साथ शुरू हुआ था. उन्होंने अपने करियर में अब तक बिहार सरकार के 5 अलग-अलग क्षेत्रों में 14 महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है. उनके पास भूमि राजस्व, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, और ग्रामीण विकास जैसे विभागों का गहरा अनुभव है.
वे बिहार के कई प्रमुख जिलों जैसे पश्चिम चम्पारण (बेतिया), मधुबनी, गया, सिवान, सारण और मुंगेर में जिलाधिकारी (DM) के रूप में तैनात रहे हैं. डीएम के तौर पर उन्होंने सीधे जनता से जुड़कर उनकी समस्याओं का समाधान किया, जिसका फायदा आज उन्हें सरकार के नीतिगत फैसलों में मिलता है.
सीएम सम्राट चौधरी ने दी बड़ी जिम्मेदारी
नई नियुक्ति के साथ अब लोकेश कुमार सिंह के कंधों पर एक साथ कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं:
सचिव, मुख्यमंत्री सचिवालय: यह उनका सबसे अहम रोल है, जहां वे सीधे सीएम की योजनाओं को लागू करवाएंगे.
सचिव, पर्यटन विभाग: बिहार में पर्यटन की अपार संभावनाओं को पंख लगाने की जिम्मेदारी भी अब इनके पास है.
विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा विभाग: इस विभाग के सचिव का अतिरिक्त प्रभार भी इनके पास बना रहेगा.
खास बात यह है कि लोकेश कुमार सिंह का पटना में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग में सचिव के तौर पर 3 साल 9 महीने का सबसे लंबा कार्यकाल रहा है, जो उनकी स्थिरता और कार्यकुशलता को दर्शाता है.
निभा चुके हैं संकटमोचक की भूमिका
स्वास्थ्य विभाग के सचिव के रूप में कोरोना काल के दौरान उन्होंने जिस तरह स्थिति को संभाला, उसने उन्हें एक सक्षम अधिकारी के तौर पर स्थापित किया. ग्रामीण विकास और बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड (BSEB) जैसे संवेदनशील विभागों में भी वे अपनी छाप छोड़ चुके हैं.
यही कारण है कि सीएम सम्राट चौधरी ने उन पर भरोसा जताया है. सचिवालय के सचिव के रूप में उनकी नियुक्ति यह संकेत देती है कि बिहार में अब विकास योजनाओं की मॉनिटरिंग और भी सख्त और तेज होने वाली है. मुख्यमंत्री को एक ऐसे अधिकारी की तलाश थी जो अनुभवी भी हो और बिहार की नस-नस से वाकिफ भी, और लोकेश कुमार सिंह इस सांचे में पूरी तरह फिट बैठते हैं.