पटना। राज्य सरकार ने निजी विद्यालयों में बच्चों के पुनर्नामांकन शुल्क लेने पर रोक लगा दी है। साथ ही निजी विद्यालयों द्वारा अन्य प्रतिबंधित शुल्क लेने पर भी रोक लगायी गई है। इसका उल्लंघन करने वाले निजी विद्यालयों की मान्यता रद होगी और उन पर आर्थिक दंड भी लगाया जाएगा। यह आदेश निजी विद्यालयों द्वारा अभिभावकों को आर्थिक शोषण से बचाने हेतु शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डा. बी. राजेन्दर के हस्ताक्षर से जारी किया गया है।
नो प्रॉफिट, नो लास के सिद्धांत पर संचालित करें विद्यालय
शिक्षा विभाग ने निजी विद्यालयों के संचालकों को साफ कहा है कि निजी विद्यालयों का संचालन एक व्यवसाय के रूप में नहीं, बल्कि समाज सेवा का कार्य नो प्राफिट, नो लास के सिद्धांत पर किया जाना है।
बच्चों का मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा अधिनियम-2009, बिहार राज्य बच्चों की मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा नियमावली-2011 (समय-समय पर निर्गत अधिसूचना एवं आदेश), बिहार निजी विद्यालय (शुल्क विनियम) अधिनियम-2019, सीबीएसई-आइसीएसई से मान्यता प्राप्त करने हेतु विभाग के स्तर से निर्गत एनओसी से संबंधित प्राविधान, बीएसईबी-सीबीएसई-आइसीएसई से संबद्धता हेतु संबंधित बोर्ड के नियम एवं दिशा-निर्देश तथा विभिन्न न्यायादेशों के आलोक में यह आदेश जारी किया गया है।
अपनी सुविधा से पुस्तकें व अन्य सामग्री खरीदेंगे अभिभावक
आदेश के मुताबिक निजी विद्यालयों को सभी प्रकार के शुल्कों का विवरण विद्यालय के सूचना-पट्ट एवं वेबसाइट पर प्रकाशित करना अनिवार्य होगा। स्कूल सामान्यतः उक्त शुल्क में वृद्धि नहीं करेंगे, ताकि अभिभावकों पर अध्यापन व्यय मद में अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़े।
यह इसलिए भी आवश्यक है कि छात्र-छात्राओं को बिना व्यवधान के उनकी स्कूली शिक्षा को पूर्ण कराया जा सके। यदि शुल्क वृद्धि अनिवार्य हो, तो सुसंगत प्राविधानों में निहित सीमा एवं विहित प्रक्रिया का अनुपालन कर ही करेंगे। निजी विद्यालयों द्वारा पुनर्नामांकन शुल्क एवं अन्य प्रतिबंधित शुल्क नहीं लिया जाएगा। विद्यालयों को पुस्तकों एवं पठन-पाठन सामग्री के साथ अन्य आवश्यक सामग्रियों की सूची सूचना पट्ट एवं वेबसाइट पर प्रदर्शित करनी होगी।
अभिभावक अपनी सुविधानुसार किसी भी दुकान अथवा विक्रेता से पुस्तकों एवं पठन-पाठन सामग्री तथा अन्य सामग्री खरीद सकते हैं। संबंधित विद्यालय द्वारा किसी दुकान-प्रतिष्ठान से पठन-पाठन समेत अन्य सामग्री खरीदने हेतु बाध्य नहीं किया जाएगा।
बार-बार नहीं बदले जाएंगे पाठ्य-पुस्तकें व यूनिफॉर्म
आदेश में कहा गया है कि विद्यालय पाठ्यपुस्तक एवं यूनिफॉर्म का पैटर्न बार-बार नहीं बदलेंगे। आवश्यकता पड़ने पर विद्यालय स्तर पर गठित शिक्षक-अभिभावक संघ से इसकी अनुमति प्राप्त कर ही करेंगे।
विद्यालय यह सुनिश्चित करेगा कि अभिभावकों या विद्यार्थियों पर निर्धारित पाठ्यक्रम से अतिरिक्त अध्ययन सामग्री खरीदने हेतु कोई अनावश्यक दबाव न डाला जाए।
किसी भी छात्र-छात्रा को शुल्क बकाया रहने की स्थिति में कक्षा, परीक्षा अथवा परिणाम से वंचित नहीं किया जाएगा, जब तक कि प्रचलित नियमों के अनुसार आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण न की गयी हो।