हिमाचल में अब प्लास्टिक कचरे से बनेंगी सड़कें, सरकार ने नई एसओपी की जारी

शिमला। हिमाचल सरकार ने सड़कों के निर्माण में प्लास्टिक कचरे के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए नई एसओपी जारी की है। इस पहल से सड़क निर्माण में बिटुमिन का उपयोग कम होगा और उसकी बजट होगी। एसओपी के अनुसार, प्लास्टिक कचरे में धूल और अन्य अशुद्धियों की मात्रा एक प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए।

शहरी निकायों को प्लास्टिक को साफ करने के साथ-साथ 2.36 मिमी से 600 माइक्रोन आकार में श्रेड (कतरन) करना होगा। निर्धारित आकार से बड़ा प्लास्टिक उपयोग में नहीं लिया जाएगा। लोक निर्माण विभाग, शहरी निकायों, पर्यावरण विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समन्वय से यह व्यवस्था लागू की जाएगी।

छंटाई और संग्रहण का प्रशिक्षण देंगे
अधिसूचना के अनुसार, लोक निर्माण विभाग अपनी आवश्यकता के अनुसार प्रत्येक वित्तीय वर्ष में संबंधित शहरी निकायों को लिखित रूप से बताएगा कि सड़क निर्माण के लिए कितनी मात्रा में साफ प्लास्टिक कचरे की आवश्यकता है। इसके बाद विभागीय अधिकारी 15 दिन में शहरी निकायों का दौरा कर उन्हें ऐसे प्लास्टिक की पहचान, छंटाई और संग्रहण का प्रशिक्षण देंगे, जिसका उपयोग सड़क निर्माण में किया जा सकेगा।

केवल कैरी बैग, प्लास्टिक बोरे, दूध की थैलियां तथा कास्मेटिक और डिटर्जेंट की बोतलों से प्राप्त लचीला प्लास्टिक कचरा ही सड़क निर्माण में उपयोग होगा। कठोर प्लास्टिक तथा काले रंग की प्लास्टिक फिल्म का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा।

रखा जाएगा डिजिटल रिकॉर्ड
शहरी निकायों द्वारा तैयार किए गए प्लास्टिक कचरे का संयुक्त निरीक्षण संबंधित कार्यकारी अभियंता और नगर निकाय के अधिकारियों द्वारा किया जाएगा। निरीक्षण रिपोर्ट को संबंधित मुख्य अभियंता, पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेजा जाएगा। प्लास्टिक कचरे की मात्रा और प्रकार का डिजिटल रिकॉर्ड भी रखा जाएगा।

आठ प्रतिशत प्लास्टिक कचरा मिलाया जाएगा
एसओपी के अनुसार, एकत्रित और श्रेड किए गए प्लास्टिक कचरे को संबंधित विभाग के कार्यकारी अभियंता उठाएंगे और आवश्यकता पड़ने पर अन्य मंडलों को भी उपलब्ध करवाया जाएगा। सड़क निर्माण में बिटुमिन मिश्रण तैयार करते समय बिटुमिन के भार का आठ प्रतिशत प्लास्टिक कचरा मिलाया जाएगा। यह प्रक्रिया भारतीय सड़क कांग्रेस के दिशा-निर्देशों के अनुरूप होगी।

मासिक रिपोर्ट देनी होगी
सभी कार्यकारी अभियंताओं को प्रत्येक माह यह रिपोर्ट देनी होगी कि शहरी निकायों से कितना प्लास्टिक कचरा प्राप्त हुआ और उससे कितनी लंबाई की सड़कें निर्मित की गईं। लोक निर्माण विभाग को पर्यावरणीय सुरक्षा, छंटाई मानकों और प्लास्टिक कचरे के सुरक्षित उपयोग से संबंधित एक प्रशिक्षण मॉड्यूल भी तैयार करना होगा।