LPG Price Update: मिडिल ईस्ट में तनाव शुरू होने के साथ ही ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट बंद कर दिया था. इसके बाद ग्लोबल सप्लाई चेन टूट गई और दुनियाभर के कई देशों में क्रूड ऑयल और एलएनजी का संकट गहरा गया. भारत में भी सरकार ने पैनिक बाइंग नहीं करने की अपील के साथ ही गैस बुकिंग करने का टाइम बढ़ा दिया. मार्च और अप्रैल के महीने में मिडिल ईस्ट में चल रही टेंशन और जंग के हालात की वजह से देश में क्रूड ऑयल (Crude Oil) और एलपीजी (LPG) की सप्लाई पर बुरा असर पड़ा था. पिछले दिनों गैस डिलीवरी के लिए लगी लंबी-लंबी लाइन से अब राहत देखी जा रही है. पिछली सप्लाई जंग से पहले के लेवल की तरफ धीरे-धीरे फिर से बहाल हो रही है.
मोदी सरकार की पॉलिसी की बदौलत मई के महीने में गैस और एलएनजी की हालत में सुधार देखा जा रहा है. शिप-ट्रैकिंग डेटा फर्म ‘केपलर’ की रिपोर्ट के अनुसार भारत में क्रूड ऑयल और रसोई गैस के आयात (Import) में शानदार रिकवरी आई है. इससे आने वाले दिनों में आम जनता को राहत मिलने की उम्मीद है. आंकड़ों पर नजर डालें तो मार्च और अप्रैल के महीने के दौरान क्रूड ऑयल करीब 45 लाख बैरल रोजाना तक आ गया था. लेकिन सरकार की कोशिश रंग लाई और अब मई के महीने में यह आंकड़ा बढ़कर करीब 49 लाख बैरल प्रतिदिन पर पहुंच गया.
फरवरी के आयात से कुछ कम रहा मई का आंकड़ा
हालांकि, फरवरी के आंकड़े 52 लाख बैरल प्रतिदिन के मुकाबले मई का आंकड़ा थोड़ा कम है. यानी ईरान जंग से पहले की ग्लोबल सप्लाई चेन अभी पूरी तरह पटरी पर नहीं लौटी है. सरकार ने इस दौरान समझदारी से कदम उठाते हुए अलग-अलग देशों से तेल खरीदने की पॉलिसी को अपनाया है. इससे देश के अंदर फ्यूल की किसी तरह की कमी नहीं हुई. क्रूड के दाम और सप्लाई के बीच मची उथल-पुथल के बीच रूस भारत के लिए सबसे भरोसेमंद साथी साबित हुआ है.
संकट के बीच भी नहीं टूटी क्रूड ऑयल सप्लाई
ग्लोबल लेवल पर जियो-पॉलिटिकल टेंशन के बीच भी रूस ने भारत को क्रूड ऑयल की सप्लाई में किसी तरह की कमी नहीं आने दी. दूसरी तरफ इराक और कुवैत से आने वाली सप्लाई में उतार-चढ़ाव देखा गया. हालात को देखते हुए भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों ने रूस से क्रूड ऑयल के आयात को तवज्जो दी. मई में भारत को तेल सप्लाई करने वाले देशों की लिस्ट में बड़ा फेरबदल देखने को मिला है. इस दौरान यूएई (UAE) भारत के लिए दूसरा सबसे बड़ा क्रूड ऑयल सप्लायर बनकर उभरा है.
भारत ने एलएनजी (LNG) के मामले में भी अपनी स्थिति को मजबूत कर लिया है. ताजा आंकड़ों के अनुसार हालिया महीनों में भारत के एलएनजी इम्पोर्ट में कतर की हिस्सेदारी गिर गई है. कतर पर निर्भरता कम करते हुए भारत ने अमेरिका, ओमान, नाइजीरिया और अंगोला से एलएनजी की सप्लाई को बढ़ा दिया है.