कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में खराब प्रदर्शन बाद टीएमसी अब बड़े राजनीतिक संकट का सामना कर रही है। पार्टी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में सांसदों के एक समूह ने बगावती तेवर अपनाते हुए बीजेपी नेतृत्व वाले एनडीएके करीब जाने के संकेत दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, काकोली घोष दस्तीदार ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर दावा किया है कि टीएमसी के 28 सांसदों में से 20 सांसद एनडीए में शामिल होना चाहते हैं। दूसरी ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मजबूती से खड़े दिखाई दे रहे हैं। इनमें कीर्ति आजाद, महुआ मोइत्रा, सौगत रॉय और अन्य वफादार नेता शामिल हैं। हालांकि कई सांसद अभी भी खुलकर किसी पक्ष में नहीं आए हैं। सबसे ज्यादा चर्चा आसनसोल से सांसद और बॉलीवुड अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा की चुप्पी को लेकर हो रही है।
शत्रुघ्न सिन्हा अभी तक ‘खामोश’
अपने बेबाक बयानों और मशहूर ‘खामोश!’ डायलॉग के लिए पहचान रखने वाले शत्रुघ्न सिन्हा ने अभी तक न तो बागी गुट का समर्थन किया है और न ही ममता बनर्जी के पक्ष में कोई सार्वजनिक बयान दिया है। ऐसे समय में उनकी चुप्पी राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलों को जन्म दे रही है। मूल रूप से बिहार के रहने वाले शत्रुघ्न सिन्हा का राजनीतिक सफर उनकी पार्टी के साथी कीर्ति आजाद जैसा ही रहा है। आजाद की तरह शत्रुघ्न ने भी बीजेपी और कांग्रेस के बीच पाला बदला और आखिरकार टीएमसी में शामिल हो गए। ममता की ‘दरियादिली’ और बड़ी संख्या में प्रवासी वोटरों की वजह से दोनों नेताओं ने अपना राजनीतिक आधार बिहार से दिल्ली शिफ्ट कर लिया।
19 सांसदों की जरूरत
बता दें कि काकोली और उनके बागी गुट को अपनी लोकसभा सदस्यता गंवाए बिना पाला बदलने के लिए कम से कम 19 सांसदों की जरूरत है। दलबदल विरोधी कानून के नियमों में से एक यह है कि अगर किसी पार्टी के कम से कम दो-तिहाई विधायक किसी दूसरी पार्टी में विलय करने के लिए सहमत हो जाते हैं तो पार्टी छोड़ने या पार्टी के निर्देशों के खिलाफ वोट करने पर सांसदों को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। हालांकि, ममता के वफादारों का कहना है कि काकोली के पास जरूरी संख्या नहीं है। बर्धमान-दुर्गापुर के सांसद कीर्ति आजाद ने कहा कि बागी नेताओं की बैठक में सिर्फ 13 सांसद शामिल हुए थे।