फतेहाबाद। गांव नहला आज पूरे हरियाणा में अपनी अलग पहचान बना चुका है। सरकारी नौकरियों, सेना और प्रशासनिक सेवाओं में यहां के युवाओं ने ऐसा मुकाम हासिल किया कि गांव को अब सरकारी नौकरियों का गढ़ कहा जाने लगा है। गांव के बुजुर्गों के अनुसार बाबा तीर्थनाथ के तालाब में स्नान करने और उसका पानी पीकर लोग निहाल होते थे, इसी वजह से गांव का नाम नहला पड़ा।
करीब 18 हजार आबादी और 7600 वोटों वाले इस गांव में शिक्षा के प्रति जागरूकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां करीब 500 सरकारी कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं 50 से अधिक रिटायर फौजी और करीब 50 जवान वर्तमान में भारतीय सेना में सेवाएं दे रहे हैं।
राजनीति से शुरू हुई पहचान की कहानी
नहला गांव की पहचान को सबसे बड़ा मुकाम वर्ष 1967 के विधानसभा चुनावों से मिला। उस समय बड़ोपल हलके से मेहरचंद बैनीवाल और पृथ्वी सिंह गोरखपुरिया के बीच कांटे की टक्कर हुई थी, जिसमें मेहरचंद विजयी रहे। इसके बाद गांव में राजनीतिक जागरूकता बढ़ी और लोगों का ध्यान शिक्षा की ओर गया।
गांव से कई बड़े अधिकारी निकले। आइएएस पीके चौधरी हरियाणा सरकार में चीफ सेक्रेटरी पद से रिटायर हुए, जबकि आइएएस बलवान सिंह डीसी पद से सेवानिवृत्त हुए।
आइपीएस बलबीर सिंह बैनीवाल पुलिस कप्तान रहे। सज्जन सिंह भारतीय सेना में कर्नल पद से रिटायर हुए। इसके अलावा कर्ण सिंह बैनीवाल बीइओ, ओमप्रकाश बैनीवाल एससी और धर्मपाल बैनीवाल पब्लिक हेल्थ विभाग में चीफ इंजीनियर के रूप में सेवाएं दे चुके हैं।
पंचायतों ने विकास को दी रफ्तार
गांव के विकास में पंचायतों की अहम भूमिका रही है। ग्राम पंचायत के पास करीब 35 एकड़ जमीन है। सबसे पहले सरपंच धनपत ने विकास कार्यों की शुरुआत की।
इसके बाद टेकचंद, फूल सिंह, ओमप्रकाश, सुरजबान, भरत सिंह कुम्हार, दुर्गावती, ज्ञानीराम, मास्टर छज्जूराम, नीलम और वर्तमान सरपंच कृष्ण ढिल्लों ने गांव को विकास की पटरी पर आगे बढ़ाया। फूल सिंह पंचायती चेयरमैन और होशियार सिंह मार्केट कमेटी चेयरमैन भी रह चुके हैं। गांव में छह नंबरदार और छह चौपालें हैं, जिनमें विभिन्न समाजों की अलग-अलग चौपाल शामिल हैं।
शिक्षा, खेल और सुविधाओं में आगे
नहला गांव में 32 केवी बिजलीघर, स्टेडियम, सीनियर सेकेंडरी स्कूल, राजकीय कन्या हाई स्कूल, कन्या प्राइमरी स्कूल, पीएचसी, पशु अस्पताल और दो वाटर सप्लाई योजनाएं संचालित हैं। इनमें एक आरओ आधारित पेयजल योजना भी शामिल है। गांव में बाबा तीर्थनाथ मंदिर और ऐतिहासिक तालाब आज भी आस्था का केंद्र बने हुए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि तालाब के पास खड़ा करीब 300 साल पुराना हरा झंड आज भी जस का तस खड़ा है।
खेलों में भी गांव का नाम आगे रहा है। पहलवान दाना और खिलाड़ी सुरेश कुमार ने गांव को प्रदेश स्तर पर पहचान दिलाई। ग्रामीण अब गांव में लड़कियों के लिए कालेज, टेक्निकल कॉलेज और पीएचसी तक बेहतर सड़क की मांग कर रहे हैं।