मध्य प्रदेश वैज्ञानिकों का बड़ा गेम चेंजर; देश का पहला AI टूल, मिनटों में डिटेक्ट होगा कैंसर

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में वैज्ञानिकों की एक संयुक्त टीम ने भारतीय डेटा-सेट के आधार पर देश का पहला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कैंसर टूल HISTO-UNET विकसित किया है. यह आधुनिक टूल बायोप्सी स्लाइड्स को पढ़कर महज कुछ ही मिनटों में यह सटीक रूप से बता देगा कि मरीज को कैंसर है या नहीं. विशेषज्ञाओं का मानना है कि सेंट्रल इंडिया में तेजी से बढ़ रहे ओरल कैंसर के मामलों को देखते हुए यह खोज कैंसर की समय पर पहचान करने में एक गेम-चेंजर साबित होने वाली है.

​संयुक्त चिकित्सा-तकनीकी रिसर्च से मिली बड़ी कामयाबी

बता दें कि ​इस इस तकनीक का निर्माण भोपाल के प्रमुख संस्थानों और वैश्विक सहयोग के जरिए संभव हो पाया है. इसमें आईआईएसईआर (IISER) (Indian Institute of Science Education and Research) भोपाल, एम्स भोपाल, जवाहरलाल नेहरू कैंसर अस्पताल और ब्रिटेन की प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों व रिसर्च स्कालर्स ने मिलकर काम किया है. इस इंटरडिसिप्लिनरी टीम ने करीब 1 साल की कड़ी मेहनत के बाद इस एआई मॉडल को तैयार किया है.

​92 प्रतिशत सटीकता के साथ त्वरित पहचान

​शोधकर्ताओं के अनुसार इस एआई टूल को प्रशिक्षित करने के लिए भारतीय मरीजों के 2,000 से अधिक बायोप्सी स्लाइड्स के डेटा का उपयोग किया गया है. इस समृद्ध और स्थानीय डेटा-सेट के कारण टूल का एक्यूरेसी लेवल 92 फीसदी तक पहुंच गया है. यह केवल मुंह (ओरल) के कैंसर की ही नहीं, बल्कि सिर और गर्दन में होने वाले घातक कैंसर (स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा) की कोशिकाओं को भी पूरी बारीकी से पहचानने में सक्षम है.

समय और मानवीय भूल की संभावना में भारी कमी

​पारंपरिक रूप से लैब एक्सपर्ट्स को एक बायोप्सी स्लाइड का गहन अध्ययन करने में कम से कम 30 मिनट का समय लगता है और मानवीय त्रुटि की आशंका को खत्म करने के लिए दूसरे विशेषज्ञ की राय भी जरूरी होती है. इस पूरी प्रक्रिया में लगभग 1 घंटे का समय लग जाता है, लेकिन यह नया एआई टूल माडर्न माइक्रोस्कोपिक हाई-रिजाल्यूशन फोटो यानि हिस्टोपैथोलॉजी छवियों की मदद से कुछ ही मिनटों में अंतिम परिणाम दे देता है. इससे डाक्टरों पर काम का दबाव कम होगा और मरीजों का इलाज तुरंत शुरू हो सकेगा.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना और भविष्य की राह

​भोपाल के वैज्ञानिकों की इस खोज को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी बड़ी पहचान मिली है. अप्रैल 2026 में यूनाइटेड किंगडम के लंदन में आयोजित इंटरनेशनल सिम्पोजियम ऑन बायोमेडिकल इमेजिंग में इस महत्वपूर्ण रिसर्च को प्रकाशित किया गया है. नीति आयोग के सदस्य और आईआईएसईआर भोपाल के निदेशक प्रो. गोवर्धन दास के अनुसार “भारत जैसे विशाल आबादी वाले देश में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त और सुलभ बनाने के लिए चिकित्सकों, इंजीनियरों और वैज्ञानिकों के बीच ऐसे और भी साझा शोध प्रयासों की तत्काल आवश्यकता है.”