मुंबई। शिवसेना प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने मंगलवार को कई मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिन्ह से जुड़े विवाद, कांग्रेस वनेता प्रियंक खड़गे आरएसएस पर की गई टिप्पणी, नागपुर में कथित धर्मांतरण के मामले, महाराष्ट्र की राजनीति में ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा और विपक्षी एकता को लेकर कांग्रेस की भूमिका पर खुलकर अपनी बात रखी।
ममता बनर्जी के ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के चुनाव चिन्ह पर उठ रहे सवालों को लेकर कृष्णा हेगड़े ने दावा किया कि पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है और बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों के अलग होने की खबरें सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि टीएमसी का चुनाव चिन्ह संकट में आ गया है। यदि पार्टी के भीतर टूट और बहुमत से जुड़े दावे अदालत तक पहुंचते हैं, तो कोर्ट बहुमत के आधार पर फैसला ले सकती है। पहले भी शिवसेना के मामले में एकनाथ शिंदे को पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह मिला था। इसी तरह एनसीपी के मामले में अजित पवार को भी पार्टी का नाम और चिन्ह मिला था।
ऐसे में ममता बनर्जी के हाथ से भी पार्टी का चुनाव चिन्ह और नाम जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कर्नाटक सरकार के मंत्री प्रियंक खड़गे द्वारा आरएसएस पर की गई टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए हेगड़े ने कहा कि आरएसएस एक स्वयंसेवी संगठन है, जो आपदा और संकट के समय लोगों की मदद के लिए आगे आता है। उन्होंने कहा कि आरएसएस के कार्यकर्ता बाढ़, प्राकृतिक आपदा या किसी भी संकट की घड़ी में लोगों की सेवा करते हैं। प्रियंक खड़गे को शायद आरएसएस के कार्यों की पूरी जानकारी नहीं है। बिना वजह विवाद खड़ा करना उचित नहीं है।
नागपुर की एक महिला द्वारा मांस खाने, उर्दू सीखने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने के लगाए गए आरोपों पर कृष्णा हेगड़े ने कहा कि मामले में पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि जांच के क्रम में महिला के आरोप अगर सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसे मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक अदालतों में होनी चाहिए और दोषियों को जल्द से जल्द सख्त सजा मिलनी चाहिए। हेगड़े ने कहा कि महाराष्ट्र में धर्मांतरण से जुड़े मामलों की निगरानी के लिए समिति गठित की गई थी, जिसमें कई शिकायतें सामने आई थीं।
उन्होंने अन्य राज्यों से भी ऐसे मामलों में कठोर कानून लागू करने की अपील की। महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चित ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर शिवसेना प्रवक्ता ने कहा कि ऐसा कोई अभियान चलाने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे गुट के अधिकांश नेता और कार्यकर्ता पहले ही एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ आ चुके हैं। राज्य के विभिन्न हिस्सों से लगातार नेता और कार्यकर्ता हमारे साथ जुड़ रहे हैं। इसलिए किसी ऑपरेशन टाइगर की जरूरत नहीं है।
उन्होंने दावा किया कि उद्धव ठाकरे गुट के भीतर असंतोष और टूट की स्थिति है तथा जमीनी स्तर पर काम करने वाले नेतृत्व की ओर लोगों का रुझान बढ़ रहा है। डीएमके के मुखपत्र ‘मुरासोली’ में राहुल गांधी की विपक्षी एकता की अपील पर उठाए गए सवालों को लेकर कृष्णा हेगड़े ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि डीएमके नेताओं ने भी कांग्रेस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस ने सहयोगी दलों के साथ विश्वास कायम नहीं रखा। ऐसे में विपक्षी गठबंधन के भविष्य को लेकर और भी चुनौतियां सामने आ सकती हैं।