“पकड़कर भरत तिवारी को मारी गई गोली”… जहां चली गोली, वहां से चश्मदीदों ने सुनाई पूरी कहानी

आरा. भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में पुलिस एनकाउंटर में घायल हुए भरत तिवारी की मौत के बाद पूरा इलाके लोगों में शासन के प्रति आक्रोश है, पुलिस के लिए नफरत और परिजनों की बेबसी और लाचारगी उनके चेहरों से समझी जा सकती है. फर्जी एनकाउंटर की बात सरेआम है, हर तरफ लोग यही कह रहे हैं कि पुलिस ने पकड़ा और फिर मार डाला. वहीं, पुलिस का दावा है कि भरत तिवारी ने पुलिस टीम पर फायरिंग की थी, जबकि परिजन और स्थानीय लोग इस दावे का प्रतिकार करते हुए इसे प्रत्यक्ष फर्जी एनकाउंटर बता रहे हैं. इन्हीं दावों और प्रतिदावों के बीच न्यूज 18 की टीम घटना के बाद ग्राउंड जीरो पर पहुंची, जहां चश्मदीदों, ग्रामीणों और परिजनों ने अपनी-अपनी बातें रखीं. खास बात यह कि विस्थापित परिवारों ने मृतक भरत तिवारी को अपना ‘भगवान’ बताते हुए कई बड़े दावे किए.

ग्राउंड जीरो पर आज भी ताजा हैं उस सुबह की यादें
जवाईनिया गांव का वह इलाका उस घटना (कथित रूप से फर्जी एनकाउंटर) की गवाही देता नजर आता है. यहां रहने वाले विस्थापित परिवारों का कहना है कि भरत तिवारी वर्षों से उनकी लड़ाई लड़ रहे थे. गांव वालों के मुताबिक, बिजली, पानी, सड़क और दूसरी मूलभूत सुविधाएं दिलाने के लिए उन्होंने लगातार प्रशासन के सामने आवाज उठाई. लोगों का कहना है कि अगर भरत तिवारी नहीं होते तो आज भी यह बस्ती बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहती.

‘सुबह आठ बजे पुलिस पहुंची, फिर बदल गया पूरा माहौल’
ग्राउंड जीरो पर न्यूज18 संवाददाता चंदन कुमार से बातचीत में चश्मदीद मंटू कुमार ने दावा किया कि घटना वाले दिन सुबह करीब आठ बजे अचानक बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी वहां पहुंचे. उस समय महिलाएं खाना बना रही थीं और लोग अपने-अपने काम में लगे थे. पुलिस के पहुंचते ही पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई. मंटू कुमार का दावा है कि पुलिस ने वहां मौजूद लोगों को डंडे मारकर और डराकर मौके से हटा दिया. इसके बाद कुछ देर तक केवल पुलिस और भरत तिवारी ही वहां मौजूद रहे. ग्रामीणों का कहना है कि थोड़ी ही देर बाद गोली चलने की आवाज आई.