महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल मची हुई है. बालासाहेब ठाकरे द्वारा बनाई गई शिवसेना टुकड़ों में बंटने की कगार पर है. ऐसे में उद्धव ठाकरे के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हुई है. शिवसेना यूबीटी पर अस्तित्व को बचाने के लिए संकट का सामना कर रही है. हाल ही में शिवसेना की 60वीं वर्षगांठ करीब है. इस समय दशकों तक मुंबई पर राज करने वाली पार्टी पर खतरा मंडरा रहा है.
खबरें हैं कि उद्धव गुट के 6 सांसद शिंदे गुट में विलय करने जा रहे हैं, जिसको लेकर उन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखा है. शिवसेना में बगावती सुर के बीच उद्धव ठाकरे ने नई दिल्ली में संसदीय दल की बैठक बुलाई जिसमें एक भी बागी सांसद शामिल नहीं हुआ. बता दें कि उद्धव के हाथ से पहले पार्टी का सिंबल गया, विधायक गए, पार्टी गई और अब सांसद गए तो वह सबसे बड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं.
एकनाथ शिंदे की पार्टी में शामिल होंगे 6 सांसद
उद्धव ठाकरे ने पार्टी के 6 सांसदों के एकनाथ शिंदे के साथ जाने की अटकलों के बीच तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा, “वे अकेले चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं. जो भी पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे छोड़ सकते हैं.” इससे पहले उद्धव ठाकरे चुप्पी साधे हुए अपनी अगली रणनीति को लेकर काम करने की तैयारी कर रहे थे.
महाराष्ट्र की राजनीति में ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा
पिछले कई दिनों से महाराष्ट्र की राजनीति में ‘ऑपरेशन टाइगर’ खूब चर्चा में हैं. इस दलबदल को एकनाथ शिंदे का ‘ऑपरेशन टाइगर’ कहा जा रहा है. शिवसेना पर आए इस संकट को राज्यसभा सांसद संजय राउत सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं. संजय राउत दिल्ली में हैं. वहीं पार्टी के सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई भी दिल्ली में ही ठहरे हुए हैं. बताया जा रहा है कि संजय राउत दलबदल को रोकने के लिए किताबों और संसदीय प्रक्रिया का अध्यन करने में लगे हैं.
संजय राउत और अनिल देसाई ने दिल्ली के प्रमुख वकीलों के साथ इस बात पर बातचीत की कि अगर छह सांसद बेहतर अवसरों की तलाश में अगर पार्टी बदल लेते हैं तो उसमें क्या कानूनी उपाय किए जाने चाहिए. इसको लेकर अनिल परब ने बताया कि अगर सुप्रीम कोर्ट यूबीटी और शिंदे गुट के धनुष-बाण चिन्ह वाले फैसले पर सुनवाई की होती तो हमारा पक्ष मजबूत होता.”
शिवसेना संकट पर क्या बोले एक्सपर्ट्स?
इस बीच एक्सपर्ट्स का कहना है कि ठाकरे के लिए इस संकट से निपटना चुनौती भरा हो सकता है, जिसे देश की राजनीति के तेजी से बदलते स्वरूप के रूप में देखा जाना चाहिए. लेखक और शिवसेना के इतिहासकार प्रकाश अकोलकर यह सब पैसे का खेल है. कोई भी पार्टी बीजेपी के पैस और संसाधनों का सामना नहीं कर सकती. सांसद से लेकर विधायक तक बिकने को तैयार हैं. बीजेपी जो ऐसा कर रही है यह बेहद शर्मनाक है.
उन्होंने कहा कि 20 से 25 साल के युवाओं की सिर्फ यही राय है कि उद्धव ठाकरे को बीजेपी का डटकर सामना करना चाहिए. एक कार्यकर्ता ने कहा कि अब समय आ गया है कोई बीजेपी के सामने खड़ा हो और देश में विपक्षी पार्टियों को खत्म करने की नापाक साजिश को पर्दाफाश करे.
वहीं दूसरी तरफ कई शिवसैनिक ‘ऑपरेशन टाइगर के विरोध के लिए सड़कों पर उतरने के लिए भी तैयार हैं.’ बता दें कि पार्टी बदलने वाले 6 सांसदों में संजय दीना पाटिल ने पहले कहा था कि उनकी गठबंधन में जाने की मर्जी नहीं है.