सोना खरीदना है तो जल्‍दी करें, 40 फीसदी बढ़ने वाली है कीमत, होगा 2 लाख के पार

Gold Price Update : अगर आप भी सोने की खरीदारी करने की मंशा बना रहे हैं तो यही सबसे सही समय है. ग्‍लोबल मार्केट में दबाव की वजह से अभी सोने-चांदी की कीमतों में नरमी दिख रही है. लेकिन, आने वाले समय में सोने की कीमतों में 40 फीसदी का उछाल आने की संभावना जताई जा रही है. ऐसा होता है तो घरेलू बाजार में सोने का भाव 2 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम को भी पार कर जाएगा.

ग्‍लोबल इनवेस्‍टमेंट फर्म जेपी मॉगर्न ने भविष्‍यवाणी की है कि पश्चिम एशिया युद्ध की वजह से पिछले कुछ समय से सोने और चांदी की कीमतों पर खासा दबाव दिखा और इसके दाम भी नीचे आए, लेकिन अब युद्ध समाप्‍त हो चुका है और एक बार फिर कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना दिख रही है. जेपी मॉर्गन ने अनुमान जताया कि आने वाले 6 महीने में सोने की कीमत करीब 40 फीसदी बढ़ सकती है. अगर यह अनुमान सही साबित होता है तो भारतीय सराफा बाजार में सोने की कीमतों को लेकर नया रिकॉर्ड बन जाएगा.

जेपी मॉर्गन ने अपनी हालिया रिपोर्ट में बताया है कि इस साल के आखिर तक ग्‍लोबल मार्केट में सोने की औसत कीमत 6,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है. इतना ही नहीं, 2027 के अंत तक यह कीमत बढ़कर करीब 6,300 डॉलर प्रति औंस तक हो सकती है. यह मौजूदा स्‍तर से करीब 40 फीसदी बढ़ोतरी की संभावना दिखा रहा है. अगर कीमतें इस आंकड़े को पार करती हैं तो यह एक नया रिकॉर्ड होगा.

जेपी मॉर्गन ने बताया कि साल 2026 में पीली धातु पर सबसे ज्‍यादा असर ईरान युद्ध और उससे जुड़े तनाव का दिखा है. फरवरी के अंत से अभी तक सोने की कीमतों में 20 फीसदी से भी ज्‍यादा की गिरावट दिख रही है. इसकी वजह अमेरिका और इजराइल के बीच युद्ध रही है, जिससे क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल दिखा और डॉलर की मजबूती ने भी सोने और चांदी की कीमतों पर असर डाला है.

निवेश फर्म ने बताया कि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से महंगाई बढ़ने की आशंका भी बनी और निवेशकों को यह भरोसा हो गया कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व लंबे समय तक ब्‍याज दरों को ऊंची बनाए रख सकता है. इसी वजह से सोने और चांदी की कीमतों में नरमी दिखने लगी थी. अब जबकि युद्ध समाप्ति की घोषणा हो चुकी है तो सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर उछाल आने की संभावना है.

बाजार एक्‍सपर्ट का कहना है कि सोने पर ब्‍याज तो मिलता नहीं है, लिहाजा जब ब्‍याज दरें ऊंची रहती हैं तो निवेशक बॉन्‍ड और अन्‍य ब्‍याज देने वाली संपत्तियों का रुख करते हैं. इससे सोने पर दबाव पड़ता है और उसकी कीमतें कम हो जाती हैं. मजबूत डॉलर और फेड रिजर्व की नीतियों को देखते हुए निवेशकों ने पिछले कुछ समय से सोने से दूरी बनाए रखी. अब जबकि स्थितियां सामान्‍य हो रही हैं तो सोने की खरीदारी फिर से बढ़ने की संभावना है.

जेपी मॉर्गन ने बताया कि सोना फिलहाल दो महत्‍वपूर्ण स्‍तरों के बीच फंसा हुआ है. एक तरफ तो सोने को 200 दिनों का मूविंग एवरेज मजबूत सपोर्ट दे रहा है तो दूसरी ओर 50 दिन का मूविंग एवरेज इसकी कीमतों में और गिरावट को रोक रहा है. यही वजह है कि निवेशकों के लिए फिलहाल वेट एंड वॉच ही सबसे सही रणनीति है. हालांकि, इसमें कोई आशंका नहीं है कि आने वाले समय में सोने की कीमतें दोबारा नए रिकॉर्ड पर जा सकती हैं.

निवेश फर्म का कहना है कि आने वाले समय में सोने की कीमतें बढ़ने को कई फैक्‍टर सपोर्ट कर रहे हैं. क्रूड की स्थिति सामान्‍य होने तक महंगाई ज्‍यादा बनी रह सकती है, जिससे डॉलर की पर्चेजिंग पॉवर कम रहेगी. अमेरिका की चुनौतियां भी बढ़ रही हैं और नीतियों में भी उतार-चढ़ाव आ रहा है. भू-राजनीतिक तनाव और शक्तियों के ध्रुवीकरण की वजह से भी सोने की कीमतों को सपोर्ट मिल रहा है. ऐसे में यह माना जा रहा है कि आने वाले समय में सोना निश्चित रूप से महंगा होगा.

अगर यह देखा जाए कि खुदर बाजार में सोने की कीमत कहां तक जा सकती है तो जेपी मॉर्गन के अनुमान के मुताबिक, इसमें 40 फीसदी उछाल आ सकता है. यह उछाल 2.13 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है. सोने की कीमतों को केंद्रीय बैंकों से भी सपोर्ट मिल रहा है, क्‍योंकि दुनियाभर के सेंट्रल बैंक लगातार सोने की खरीद कर रहे हैं. इसे सोने की कीमतों में उछाल का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है.