भरत तिवारी एनकाउंटर केस की न्यायिक जांच का आदेश, आखिरकार जागी सम्राट चौधरी सरकार

पटना: भोजपुर के भरत तिवारी एनकाउंटर केस की हाईलेवल जांच का आदेश कर दिया गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भरत तिवारी एनकाउंटर केस की ज्यूडिशियल इन्क्वॉयरी यानी न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि ‘भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में दिनांक 17.06.2026 को हुई पुलिस मुठभेड़ की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच हेतु उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा न्यायिक जांच कराने का निर्णय लिया गया है। न्यायिक जांच का उद्देश्य घटना के सभी पहलुओं की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता के साथ जांच सुनिश्चित करना है।’

भरत तिवारी के ‘फर्जी’ एनकाउंटर पर भारी जनाक्रोश
सीएम सम्राट चौधरी ने भरत तिवारी एनकाउंटर की न्यायिक जांच का आदेश ऐसे ही नहीं दिया है। सामाजिक कार्यकर्ता भरत तिवारी की मौत के बाद भोजपुर जिले समेत पूरे बिहार में भारी जनाक्रोश है। लोग सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक पर इस एनकाउंटर को सीधे सीधे मर्डर बता रहे हैं। भरत तिवारी के फेसबुक लाइव में भी साफ दिख रहा है कि उसने पिस्टल फेंक सरेंडर कर दिया था। क्रांति की बातें कर रहे भरत तिवारी की बात से साफ था कि वो समस्याओं का समाधान न होने पर पूरी तरह से डिप्रेशन में चला गया था।

जवनियां गांव के लोगों के लिए भरत ने उठाई थी आवाज
भरत तिवारी शाहपुर प्रखंड के जवनिया गांव के विस्थापित लोगों की लड़ाई लड़ रहे थे। भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी मुहिम तेज हो चुकी थी। मृतक की मां आशा देवी की मानें तो पुलिस ने जानबूझकर साजिश के तहत उनके बेटे की हत्या कर दी। घटनास्थल पर मौजूद लोगों की माने तो भरत जवनिया गांव के विस्थापितों के लिए किसी भगवान से कम नहीं था। सड़क, बिजली, पानी उन लोगों के बीच में अगर पहुंची तो उसके पीछे भरत तिवारी की लगातार उठाई जा रही आवाज थी।

JDU के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने भी उठाए हैं सवाल
JDU के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने भी भरत तिवारी एनकाउंटर केस पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने साफ-साफ कहा कि ‘भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में जो वीडियो सामने आया है, वह निश्चित रूप से संदेह पैदा करता है। राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया है, लेकिन वह काफी नहीं है। सीनियर पदाधिकारी द्वारा इस मामले की समयबद्ध जांच करवा कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। सरकार जब यह कहती है कोई भी अपराधी बचेगा नहीं, तो यह सिर्फ अपराधियों के लिए नहीं होता है। अगर पुलिसकर्मी भी कोई अपराध करता है, तो वह भी बचना नहीं चाहिए, उसके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।’

पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
घरवालों का कहना है कि उन्हें अभी तक भरत तिवारी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं मिली है। आरा शहर में भी भरत तिवारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर युवाओं ने कैंडल मार्च निकाला। बार-बार सभी लोग एक ही सवाल पूछ रहे हैं कि एक निर्दोष की हत्या पुलिसवालों ने क्यों कर दी। घटना के बाद परिवार के द्वारा दिए गए आवेदन पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई थी, दूसरी तरफ भोजपुर पुलिस के द्वारा शाहपुर के तत्कालीन थाना अध्यक्ष के आवेदन पर एक दो नहीं बल्कि 3 एफआईआर थाने में दर्ज कर ली गई।