Amrita Devi Gudamalani Eco Park: बाड़मेर जिले के गुड़ामालानी में खेजड़ली बलिदान की स्मृति में अमृता देवी इको पार्क विकसित किया जा रहा है. करीब 22 बीघा भूमि पर 60 लाख रुपए की लागत से तैयार हो रहा यह पार्क अमृता देवी विश्नोई सहित 363 शहीदों को समर्पित होगा, जिन्होंने खेजड़ी के पेड़ों की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे. पार्क में वॉकिंग ट्रैक, ओपन जिम, योग स्थल और हजारों स्थानीय पौधे लगाए जा रहे हैं. इसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण का संदेश फैलाने के साथ नई पीढ़ी को खेजड़ली बलिदान के इतिहास से परिचित कराना और प्रकृति के प्रति जागरूक बनाना है.
राजस्थान के पर्यावरण संरक्षण के इतिहास की सबसे बड़ी घटनाओं में शामिल खेजड़ली बलिदान की स्मृति को सहेजने के लिए गुड़ामालानी में अमृता देवी इको पार्क विकसित किया जा रहा है. करीब 22 बीघा भूमि पर 60 लाख रुपए की लागत से तैयार हो रहा यह पार्क 363 शहीदों के अद्वितीय बलिदान को समर्पित होगा. खेजड़ली बलिदान की याद में बाड़मेर जिले के गुड़ामालानी में अमृता देवी इको पार्क तैयार किया जा रहा है. अमृता देवी विश्नोई सहित 363 लोगों ने खेजड़ी के पेड़ों को बचाने के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे. अब उसी ऐतिहासिक बलिदान को स्मरणीय बनाने के लिए यह विशेष पार्क विकसित किया जा रहा है.
करीब 22 बीघा भूमि पर विकसित हो रहे अमृता देवी इको पार्क का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है. यह पार्क खेजड़ली बलिदान की स्मृति को संरक्षित करने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से बनाया जा रहा है. पार्क में विभिन्न विकास कार्यों के साथ आगंतुकों के लिए आवश्यक सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं. यहां खेजड़ली के 363 शहीदों के बलिदान को प्रदर्शित करने और नई पीढ़ी को प्रकृति संरक्षण के प्रति प्रेरित करने की विशेष व्यवस्था होगी. प्रशासन ने निर्माण कार्य को निर्धारित समय में पूरा करने के लिए 15 जुलाई तक का लक्ष्य तय किया है.
अमृता देवी इको पार्क में स्थानीय लोगों की सुविधा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कई आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं. पार्क में इंटरलॉकिंग टाइल्स से निर्मित 8 से 12 फीट चौड़ा और करीब 1200 मीटर लंबा वॉकिंग ट्रैक बनाया गया है, जिसका उपयोग लोग सुबह-शाम सैर के लिए कर सकेंगे. युवाओं की फिटनेस के लिए 7 से 8 अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित मल्टीप्ले अष्टाकार जिम भी स्थापित की गई है. इसके अलावा महिलाओं और बच्चों के लिए 40×60 मीटर का विशेष एकांत योग स्थल विकसित किया गया है, जहां नियमित रूप से योग और स्वास्थ्य गतिविधियां आयोजित की जा सकेंगी.
इको पार्क की भूमि पर पहले से मौजूद पुराने और घने नीम के पेड़ इसकी प्राकृतिक सुंदरता को और बढ़ाते हैं. इन पेड़ों की छांव एक प्राकृतिक कैनोपी का निर्माण करती है, जहां मरुस्थलीय और प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट आगंतुकों को सुकून और मानसिक शांति का अनुभव कराएगी. शहीद अमृता देवी की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के उद्देश्य से पार्क में खेजड़ी, रोहिड़ा, जाळ और कैर जैसे मरुस्थलीय पौधों सहित करीब 5 से 6 हजार स्थानीय पौधे लगाए जा रहे हैं. यह हरित क्षेत्र जैव विविधता संरक्षण के साथ पर्यावरण जागरूकता का भी महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा.
अमृता देवी इको पार्क केवल हरियाली और ऐतिहासिक स्मृतियों का प्रतीक नहीं होगा, बल्कि यह लोगों के स्वास्थ्य, फिटनेस और मानसिक शांति का भी प्रमुख केंद्र बनेगा. पार्क में विकसित किए जा रहे वॉकिंग ट्रैक पर लोग सुबह और शाम प्रकृति के बीच सैर का आनंद ले सकेंगे. चारों ओर फैली हरियाली, खुले वातावरण और स्वच्छ हवा के बीच समय बिताने से लोगों को तनाव से राहत मिलेगी. पार्क में आने वाले पर्यटक और स्थानीय निवासी प्राकृतिक परिवेश में सुकून का अनुभव कर सकेंगे. यह स्थान पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
पार्क में योग, प्राणायाम और ध्यान के लिए भी विशेष स्थान विकसित किए जा रहे हैं, ताकि आगंतुक प्राकृतिक वातावरण में स्वास्थ्यवर्धक गतिविधियों का लाभ उठा सकें. यहां लोग पेड़ों की छांव और शांत वातावरण के बीच योग एवं ध्यान कर सकेंगे, जिससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों को लाभ मिलेगा. विशेषज्ञों के अनुसार नियमित योग और प्राणायाम तनाव कम करने, एकाग्रता बढ़ाने और जीवनशैली को बेहतर बनाने में सहायक हैं. पार्क का यह शांत परिसर लोगों को दैनिक भागदौड़ से दूर सुकून के पल प्रदान करेगा और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करेगा.