खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत से कौन होगा शामिल? सामने आ गया नाम

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत की ओर से कौन शामिल होगा? इस सवाल का सस्पेंस अब खत्म हो गया है. ईरान ने इस चार दिवसीय राजकीय कार्यक्रम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को न्योता भेजा था.

हालांकि पीएम मोदी का इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड का विदेश दौरा पहले से तय है. इस कारण वह इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सकेंगे. ऐसे में भारत की तरफ से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा को इस कार्यक्रम में भारत के प्रतिनिधित्व के लिए चुना गया है.

5 दिनों तक चलेंगे खामेनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रम
ईरान में खामेनेई के सम्मान में अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम 4 जुलाई से शुरू होंगे, जिसमें ये दोनों नेता भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे. ईरानी मीडिया के अनुसार, 4 और 5 जुलाई को तेहरान के इमाम खुमैनी मोसाला प्रार्थना हॉल में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. इसके बाद 6 और 7 जुलाई को तेहरान और धार्मिक शहर कोम में अंतिम यात्रा निकाली जाएगी.

9 जुलाई को अंतिम कार्यक्रम ईरान के पवित्र शहर मशहद में होगा, जहां खामेनेई को शिया मुसलमानों के आठवें इमाम इमाम रजा के पवित्र दरगाह परिसर में दफनाया जाएगा.

युद्ध के कारण टला अंतिम संस्कार

अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत 28 फरवरी को तेहरान में अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमले में होने की बात कही गई थी. क्षेत्र में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण उनके अंतिम संस्कार में देरी हुई. अब करीब 116 दिन बाद उनका राजकीय अंतिम संस्कार किया जा रहा है.

खामेनेई करीब 36 साल तक ईरान के सर्वोच्च नेता रहे. 86 साल की उम्र में उनकी मौत के बाद ईरान में सत्ता परिवर्तन हुआ और मार्च में उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता चुना गया.

भारत-ईरान रिश्तों के लिहाज से अहम दौरा
खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत का प्रतिनिधित्व ऐसे समय हो रहा है, जब भारत और ईरान के रिश्ते रणनीतिक रूप से अहम माने जाते हैं. ऊर्जा, व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच लंबे समय से सहयोग रहा है.

लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन का नाम भी खास महत्व रखता है, क्योंकि वह सेना में अहम जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं और वर्तमान में बिहार के राज्यपाल हैं. वहीं पबित्रा मार्गेरिटा विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं और भारत की कूटनीतिक गतिविधियों से जुड़े हुए हैं.

खामेनेई की मौत से बदला ईरान का राजनीतिक समीकरण
खामेनेई की मौत को ईरान के 46 साल पुराने शिया धर्मतंत्र के लिए एक बड़ा राजनीतिक बदलाव माना गया. उनके कार्यकाल में ईरान की विदेश नीति, अमेरिका विरोधी रुख और पश्चिम एशिया की राजनीति पर गहरा असर रहा.

अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की थी, जिसके बाद मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया था. अब उनके अंतिम संस्कार पर दुनियाभर की नजरें होंगी, क्योंकि इसमें कई देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है.