यूपी में साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश, बड़े अफसरों-कारोबारियों के बीच रह रहे थे जालसाज

UP News : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए पुलिस ने गुरुवार को 119 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। हैरानी की बात यह है कि गिरोह के सदस्य पुलिस और खुफिया एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए गोमती नगर, सतलुज अपार्टमेंट, ओमेक्स पैलेस,ओमेक्स अपार्टमेंट, दयाल पैराडाइज, राप्ती अपार्टमेंट समेत राजधानी के महंगे अपार्टमेंटों व होटलों में रह रहे थे। उनकी हाईटेक कार्यशैली और लग्जरी लाइफस्टाइल ने जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया। क्योंकि ज्यादातर आरोपियों ने इसके पहले कोई अपराध नहीं किया था तो सत्यापन के निगरानी तंत्र की पकड़ में नहीं आ सकते थे।

पुलिस ने बताया कि गिरोह के सदस्य देश के अलग-अलग राज्यों से आकर लखनऊ में किराये पर महंगे फ्लैट लेकर रह रहे थे। इन्होंने ओमेक्स पैलेस, ओमेक्स रेजीडेंसी-2, रोहतास प्लमेरिया, सतलुज अपार्टमेंट, राप्ती अपार्टमेंट, सरस्वती अपार्टमेंट, यमुना अपार्टमेंट और दयाल पैराडाइज जैसे पॉश आवासीय परिसरों को अपना ठिकाना बना रखा था। इसके अलावा ‘तमाशा इन’ और ‘सैन रोज पैराडाइज’ जैसे होटलों में भी कई सदस्य ठहरे हुए थे। जांच में सामने आया कि गिरोह के अधिकांश सदस्य गुजरात, महाराष्ट्र, मेघालय, असम, नागालैंड, मणिपुर, पश्चिम बंगाल, झारखंड, राजस्थान, उत्तराखंड, दिल्ली, बिहार और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के निवासी हैं। सभी को अलग-अलग फ्लैटों और कमरों में इस तरह रखा गया था कि किसी को पूरे नेटवर्क की जानकारी न हो सके। वे लगातार ठिकाने बदलते रहते थे, जिससे उनकी गतिविधियों पर कोई संदेह न कर सके। पुलिस के अनुसार, गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था।

महंगे अपार्टमेंट और होटल चुनने के पीछे मकसद यही था कि वहां सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होती है और बाहरी लोगों का आना-जाना सामान्य माना जाता है। आरोपी आधुनिक संचार माध्यमों का इस्तेमाल करते थे और अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी दस्तावेजों तथा अलग-अलग मोबाइल नंबरों का सहारा लेते थे। इसी वजह से उनका नेटवर्क लंबे समय तक सक्रिय बना रहा। इनका पूरा खर्च फर्म के लोग उठाते थे।

पुलिस ने कार्रवाई के दौरान सभी 119 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। उनसे पूछताछ के आधार पर गिरोह के पूरे नेटवर्क, आर्थिक लेन-देन, बैंक खातों और अन्य सहयोगियों की जानकारी जुटाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और पूछताछ के दौरान कई अन्य महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस गिरोह के तार देश के अन्य राज्यों में सक्रिय साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े हैं या नहीं।