125 दिनों तक कैसे सलामत रहा अयातुल्ला अली खामेनेई का मृत शरीर, कोई चमत्कार या फिर ईरान ने लगाई नई तरकीब?

तेहरान: इतिहास में शायद ही पहले ऐसा कोई नजारा देखने को मिला हो, जैसा ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम अंतिम विदाई में दिखा. 28 फरवरी को अमेरिकी-इजरायली हवाई हमलों में मारे गए खामेनेई का पार्थिव शरीर आखिरकार पूरे 125 दिनों यानी लगभग 4 महीनों बाद अंतिम दर्शन के लिए पहुंच चुका है. ईरान और इराक के कम से कम पांच बड़े शहरों में शुक्रवार से इस महा-अंतिम संस्कार के रस्मो-रिवाज शुरू हो गए हैं, लेकिन इस पूरी ऐतिहासिक घटना के बीच जो सवाल हर किसी के दिमाग में घूम रहा है वो ये है कि आखिर इस्लामिक नियमों के उलट, इतने भीषण युद्ध और गर्मी के बीच 125 दिनों तक अयातुल्ला का मृत शरीर कैसे सलामत रहा? क्या यह कोई चमत्कार है या फिर ईरान ने कोई नई तरकीब लगाई है?

125 दिनों तक कहां रखा था अयातुल्ला अली खामेनेई का पार्थिव शरीर
आमतौर पर इस्लामिक परंपरा और शरिया कानून के मुताबिक, किसी भी शख्स के इंतकाल के बाद उसे 24 घंटे के भीतर यानी जल्द से जल्द सुपुर्द-ए-खाक करना फर्ज माना जाता है. साइंस के मुताबिक भी जल्द से जल्द मृत शरीर का अंतिम संस्कार बेहद जरूरी होता है. ऐसे में खामेनेई के दफन को चार महीने से ज्यादा टालना पूरी दुनिया को हैरान कर रहा था. अफवाहें तो यहां तक थीं कि उन्हें पहले कहीं गुपचुप तरीके से अस्थाई रूप से दफन कर दिया गया था, लेकिन ईरानी अधिकारियों ने सफाई में कहा है कि अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे भीषण युद्ध के कारण अंतिम विदाई नहीं हो सकती थी, इसलिए खामेनेई को सुपुर्द-ए-खाक नहीं किया गया.

इस्लाम में शरीर पर केमिकल लेप लगाने या ममी बनाने की सख्त मनाही है. ऐसे में काउंटर-टेररिज्म एक्सपर्ट डॉ मोहम्मद उमर ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि अयातुल्ला के शव को सुरक्षित रखने के लिए किसी केमिकल या जादुई तरकीब का नहीं, बल्कि ईरान की एडवांस्ड फॉरेंसिक टेक्नोलॉजी और ‘फ्रीजिंग कोल्ड स्टोरेज’ का इस्तेमाल किया गया है.

शिया कानून में असाधारण और युद्ध जैसे हालातों में शव को दफनाने में देरी करने और उसे ठंड के जरिए सुरक्षित रखने की गुंजाइश दी गई है और क्योंकि वो देश के सर्वोच्च नेता थे, इसलिए धार्मिक उलेमाओं से इसके लिए विशेष छूट मिलना बेहद आसान था. ईरान के फॉरेंसिक मुर्दाघरों में वैसे भी शवों को महीनों तक सुरक्षित रखने की तकनीक मौजूद है, इसलिए चार महीने तक फ्रीजिंग टेम्परेचर में शव को रखना कोई जादू नहीं, बल्कि पूरी तरह से वैज्ञानिक तरकीब है’.

IRGC दुनिया दिखा रही पावर का सबूत
ईरान के शासक और मौलवी इस विशाल अंतिम संस्कार को कोई आम विदाई नहीं, बल्कि इस्लामिक रिपब्लिक के लिए एक ‘जनमत संग्रह’ की तरह पेश कर रहे हैं. वो दुनिया को दिखाना चाहते हैं कि अमेरिकी हमलों के बावजूद ईरान की क्रांति की आग ठंडी नहीं हुई है. कोम शहर के मुख्य इमाम अयातुल्ला मोहम्मद सैदी ने सरकारी मीडिया से कहा भी कि ‘शहीद नेता के जनाजे में उमड़ने वाला ये रिकॉर्ड तोड़ हुजूम असल में इस्लामिक रिपब्लिक के पक्ष में जनता का एक नया वोट है’.

सरकार ने इस ‘वोट’ को पक्का करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है. देश के कोने-कोने से करीब 1.5 से 2 करोड़ समर्थकों को तेहरान और अन्य शहरों में लाने के लिए मुफ्त ट्रांसपोर्ट, रहने के लिए रैन बसेरे और खाने-पीने का इंतजाम किया गया है. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने भावुक अपील करते हुए कहा है कि ‘इस ऐतिहासिक विदाई में लोगों का शामिल होना आतंकवाद, हिंसा और दादागिरी के खिलाफ एक करारा जवाब होगा और बदला लेने की हमारी गूंज पूरी दुनिया के कानों में गूंजेगी’. अयातुल्ला के शव का अगला सफर कुछ इस तरह तय किया गया है-

तेहरान (3 दिन): ग्रैंड मोसल्ला में शव को अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा.
कोम और मशहद: इसके बाद पार्थिव शरीर को ईरान के पवित्र शहरों में ले जाया जाएगा.
इराक (नजफ और कर्बला): ईरान से बाहर इराक के शिया पवित्र स्थलों पर विशेष शोक सभाएं होंगी, जहां क्षेत्रीय शिया नेटवर्क के बड़े कमांडर जुटेंगे.

9 जुलाई (दफन): अंत में, खामेनेई के अवशेषों को उनके जन्मस्थान, मशहद शहर में इमाम रजा की मशहूर दरगाह के पास हमेशा-हमेशा के लिए सुपुर्द-ए-खाक कर दिया जाएगा.

शनिवार को होने वाले मुख्य जनाजे में करोड़ों लोगों के जुटने की उम्मीद है, जिसमें दुनिया भर के बड़े नेता और विदेशी प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं. ईरानी मीडिया और इंटरनेशनल एजेंसियों से आ रही तस्वीरों में देखा जा सकता है कि ईरान के तिरंगे झंडे में लिपटे खामेनेई के ताबूत को ग्रैंड मोसल्ला ले जाया जा रहा है, जो ईरान की सबसे खास और पवित्र जगहों में से एक है. वहां लाखों की भीड़ काले कपड़ों में शोक मनाती दिखाई देगी. रही है. पूरे माहौल को लाल फूलों और हवा में लटकती सफेद तितलियों की डेकोरेशन से सजाया गया है.