भोपाल: लोकसभा में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा पेश किए गए ताजा आंकड़ों ने सड़क सुरक्षा को लेकर मध्य प्रदेश की डरावनी तस्वीर पेश की है. दरअसल, देश में होने वाले कुल हिट एंड रन मामलों में मध्य प्रदेश लगातार शीर्ष राज्यों में बना हुआ है. वर्ष 2024 में देश के कुल मामलों में से अकेले 18 प्रतिशत से अधिक हादसे मध्य प्रदेश की सड़कों पर दर्ज किए गए, जो बेहद चिंताजनक है. वहीं हिट एंड रन के 50 प्रतिशत मामलों में भी पीड़ित को मुआवजा की राशि नहीं मिल पा रही है.
सड़कों पर रफ्तार का कहर, देश में नंबर-1
संसद में केंद्रीय परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी द्वारा दिए गए जवाब के अनुसार, वर्ष 2024 में देश भर में कुल 68,584 हिट एंड रन के मामले सामने आए. इनमें से अकेले मध्य प्रदेश में रिकार्ड 12,453 मामले दर्ज किए गए. वहीं, पिछले वर्षों पर नजर डालें तो यह आंकड़ा लगातार चिंताजनक बना हुआ है. जहां 2021 में राज्य में 9,690 मामले थे, वहीं 2023 में यह संख्या 14,093 तक पहुंच गई थी.
यूपी-महाराष्ट्र से भी आगे निकला मध्य प्रदेश
यदि हम देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश से तुलना करें, तो वहां इतनी बड़ी संख्या में आबादी होने के बावजूद वर्ष 2024 में 11,209 हिट एंड रन मामले दर्ज हुए, जो मध्य प्रदेश से कम हैं. वहीं महाराष्ट्र में यह संख्या केवल 6,485, बिहार में 5,759 और तमिलनाडु में 5,799 रही. क्षेत्रफल और आबादी के अनुपात में देखा जाए तो मध्य प्रदेश में हिट एंड रन की दर अन्य राज्यों की तुलना में कहीं अधिक है.
दावों के निपटारे और मुआवजे में भारी अंतर
दुर्घटनाओं के बाद पीड़ितों को मिलने वाले मुआवजे और दावों के पंजीकरण में भी मध्य प्रदेश काफी पीछे दिखाई दे रहा है. वर्ष 2025-26 (28 फरवरी 2026 तक) के आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में 929 दावे पंजीकृत किए गए, जिनमें से केवल 425 मामलों में ही मुआवजा राशि का भुगतान किया जा सका. इसके विपरीत, बिहार जैसे राज्य में 2,811 दावे पंजीकृत हुए और रिकार्ड 2,872 मामलों का त्वरित निपटारा कर मुआवजा दिया गया.
समय पर पीड़ितों का न्याय मिलेगा
सरकार ने हिट एंड रन मोटर दुर्घटना पीड़ित मुआवजा योजना 2022 के तहत मृत्यु होने पर 2 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायल होने पर 50,000 रुपये का मुआवजा तय किया है. मंत्रालय ने राज्यों को जिला सड़क सुरक्षा समितियों के माध्यम से इन मामलों की कड़ाई से निगरानी करने और बीमा कंपनियों के साथ मिलकर दावों के त्वरित निपटारे के निर्देश दिए हैं, ताकि पीड़ितों और उनके परिवारों को समय पर आर्थिक सहायता मिल सके.
हादसा रोकने का फार्मूला भी बेअसर
वरिष्ठ अभियंता सुयश कुलश्रेष्ठ के अनुसार, ”सड़क हादसों को रोकने के लिए केंद्र सरकार का देशव्यापी 4 ई फार्मूला एजुकेशन, रोड इंजीनियरिंग, पुलिस एनफोर्समेंट और इमरजेंसी केयर भी मध्य प्रदेश में पूरी तरह फेल साबित हुआ है. राज्यों को हाईटेक कैमरों और स्पीड रडार के लिए 3000 करोड़ का बजट मिलने के बावजूद एमपी के हाईवे पर रफ्तार पर कोई नियंत्रण नहीं है.
वहीं पीड़ितों को मुआवजा मिलने में देरी के चार बड़े कारण सामने आए हैं. पहला कारण पुलिस एफआईआर और पोस्टमार्टम जैसी जरूरी कागजी कार्रवाई की कमी है. दूसरा, बीमा कंपनियों के स्तर पर फाइलें महीनों डंप रहना है. तीसरा कारण पुलिस और एसडीएम स्तर पर जांच में लंबी देरी होना है, और चौथा कारण पीड़ितों के परिजनों को जानकारी न होने से आवेदन में होने वाला विलंब है.”