नई दिल्ली: देश में मानसून के आने के साथ ही किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है। खरीफ की फसलों के लिए खाद की कमी नहीं होगी। वजह यह है कि भारत ने बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच रणनीति रूप से अहम होर्मुज स्ट्रेट के चक्रव्यूह को तोड़ने में बड़ी कामयाबी हासिल कर ली है। होर्मुज स्ट्रेट में फंसे 20 खाद वाले जहाजों में से 15 जहाज भारत की ओर निकल पड़े हैं। इस पूरे मामले में रूस एक बार फिर भारत के लिए बड़ा संकटमोचक साबित हुआ है।
होर्मुज स्ट्रेट से आ रहे खाद से लदे 15 जहाज
केंद्र सरकार ने रविवार को बताया कि फारस की खाड़ी में 20 में से 15 खाद से लदे जहाजों ने कामयाबी से होर्मुज स्ट्रेट पार कर लिया है और वे भारत की ओर बढ़ रहे हैं। ये जहाज भारत की मिट्टी को पोषण पहुंचाने वाले भंडार को बढ़ाएंगे।
दरअसल, भारत ने बीते 28 फरवरी से जब से अमेरिका-ईरान के बीच जंग की शरुआत हुई, तभी से उसने होर्मुज का वैकल्पिक रास्ता तलाशना शुरू कर दिया था। इसी रणनीति के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी समेत कई मंत्रियों और अधिकारियों ने लगातार खाड़ी के दौरे किए थे। साथ ही भारत ने लाल सागर वाले रास्ते का विकल्प भी तैयार कर लिया था।
घरेलू स्तर पर भी भारत ने बढ़ा दिया खाद उत्पादन
रिपोर्टों के अनुसार, खाड़ी के देशों से खाद मंगाने के अलावा लगातार तीन महीने अप्रैल से लेकर जून तक घरेलू यूरिया उत्पादन भी अपने लक्ष्य काफी आगे रिकॉर्ड को पार कर गया है। मौजूदा 67.9 लाख टन के लक्ष्य को पार करते हुए 71.6 लाख टन यूरिया का उत्पादन हुआ है।
विभाग ने कहा कि अप्रैल में यूरिया उत्पादन 20.3 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले 21 लाख टन तक जा पहुंचा। वहीं, मई, 2026 में यह 22.5 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले 25.2 लाख टन उत्पादन हुआ। इसी तरह जून में 25 लाख टन के टार्गेट के मुकाबले उत्पादन बढ़कर 25.4 लाख टन पहुंच गया।
बाहरी और घरेलू दोनों मोर्चों पर बड़ी कामयाबी
बाहरी और घरेलू दोनों ही मोर्चे पर भारत को बड़ी कामयाबी मिली है। इससे किसानों को मौजूदा मानसून सीजन में खरीफ की फसलों के लिए खाद की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना सुनिश्चित हो पाया है।
उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने कहा-सरकार ने संकट के समय वैकल्पिक रास्तों के जरिए मिट्टी को पोषक बनाने वाले खाद पर फोकस कर रखा था।
विदेशों में भारतीय मिशनों ने साधा संपर्क
नड्डा ने कहा-विदेशों में भारतीय मिशनों ने सक्रिय रूप से हमारे विभाग की मदद की, ताकि वैश्विक उत्पादकों और सप्लायर्स के साथ संपर्क बढ़ाया जा सके। नड्डा ने कहा-‘इसका नतीजा यह रहा कि हमारा फर्टिलाइजर आयात और घरेलू उत्पादन आज बेहद मजबूत स्थिति में आ गया।’
विदेशों में भारतीय मिशनों ने सक्रिय रूप से हमारे विभाग की मदद की, ताकि वैश्विक खाद उत्पादकों और सप्लायर्स के साथ संपर्क बढ़ाया जा सके।
जेपी नड्डा, उर्वरक मंत्री
भारत ने इन देशों से यूरिया सप्लाई की कर लिया इंतजाम
भारत ने ओमान, मलेशिया, वियतनाम, जॉर्जिया, नाइजीरिया, रूस, फिनलैंड, मिस्र, अल्जीरिया, तुर्की और नीदरलैंड्स के साथ कामयाबी से यूरिया सप्लाई की व्यवस्था कर लिया। भारत के लिए रूस संकट के समय फिर से बड़ा साथी बना है।
लाल सागर का रास्ता अपनाकर बड़ी बढ़त
भारत ने डाई अमोनियम फॉस्फेट (DAP) और नाइट्रोजन-फॉस्फोरस और पोटैशियम (NPK) की सप्लाई रूस, मोरक्को, मिस्र, अमेरिका, जॉर्डन, दक्षिण कोरिया, ट्यूनीशिया और सऊदी अरब से सुनिश्चित करने के लिए लाल सागर वाले रास्ते का सहारा लिया।
रूस में भारत भी लगा रहा फर्टिलाइजर प्लांट
अमेरिका-ईरान जंग की वजह से पैदा हुए यूरिया संकट के बीच भारत और रूस ने जॉइंट वेंचर में फर्टिलाइजर प्लांट लगाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसी साल अप्रैल के आखिर में यह खबर आई थी कि यह प्लांट रूस के समारा में लगाया जा रहा है, जो अगले दो साल में बनकर तैयार हो जाएगा। इसे लेकर हाल ही में एक भारतीय दल ने रूस का दौरा किया है। इसमें तेजी तब आई, जब बीते साल के आखिर में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत का दौरा किया था।
भारत और रूस के इस साझा प्रोजेक्ट में करीब 20 हजार करोड़ रुपए का निवेश होना है। रूस में लगने वाले 20 लाख टन क्षमता के यूरिया प्रोजेक्ट में इंडियन पोटाश लिमिटेड, RCF और NFL शामिल हैं। इस प्रोजेक्ट के जरिए भारत खाद के आयात पर निर्भरता कम करना चाहता है।
मिडिल-ईस्ट पर भारत घटा रहा निर्भरता
भारत अपने किसानों की खातिर खेती के लिए नाइट्रोजन आधारित खाद यूरिया पर बहुत ज्यादा निर्भर है। वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का करीब 71% यूरिया मिडिल-ईस्ट के देशों से आयात करता है।
रूस बन चुका है भारत के लिए बड़ा संकटमोचक
भारत के लिए उर्वरकों का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता अब रूस बन चुका है, जो भारत की कुल खाद आयात जरूरत का लगभग एक तिहाई हिस्सा प्रदान करता है। भारत रूस से मुख्य रूप से यूरिया, डीएपी (DAP), और एनपीके (NPK) जैसे जटिल उर्वरक खरीदता है।