हिमाचल में एक सप्ताह तक भारी बारिश का दौर रहेगा जारी, कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट, 12 की मौत

शिमला. हिमाचल प्रदेश में मॉनसून के सक्रिय होते ही आपदा का खतरा बढ़ गया है. बीते तीन सालों में हिमाचल में जिस तरह की तबाही देखने को मिली है, उसको देखते हुए राज्य सरकार का दावा है कि इस बार बड़े पैमाने पर तैयारी की गई है. उधर, मंगलवार को सुबह 9 बजे से बारिश का एक बड़ा अलर्ट मौसम विभाग ने जारी किया है.

हिमाचल में एक सप्ताह तक भारी बारिश का दौर रहेगा जारी, कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट
जानकारी के अनुसार, सुबह सुबह मौसम विभाग ने अलर्ट जारी करते हुए बताया कि कांगड़ा, मंडी, सिरमौर और शिमला जिले में भारी से भारी बारिश का अलर्ट रहेगा, जबकि ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर, सोलन और कुल्लू में भारी बारिश होगी. इससे पहले, सोमवार को भी प्रदेश में बारिश का दौर जारी रहा. इस वर्ष 30 जून से लेकर अब तक प्रदेश में 1 दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हुई है. जिनमें सोलन जिला में सबसे ज्यादा 7 लोग मारे गए हैं. प्रदेश को अब तक 15 करोड़ के करीब का नुकसान हुआ है.

सुबह नौ बजे शिमला के मौसम विज्ञान केंद्र ने अलर्ट जारी किया.
गौर रहे कि हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2023, 2024 और 2025 के दौरान आई प्राकृतिक आपदाओं, भारी बारिश, बाढ़, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक घटनाओं में 1 हजार से अधिक लोगों की जान जा चुकी है. उधर, मौसम विभाग ने भी प्रदेश के लिए अगले कई दिनों तक भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है. मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक शोभित कटियार ने बताया कि मानसून पूरे प्रदेश में सक्रिय बना हुआ है और अगले 5 से 7 दिनों तक अधिकांश क्षेत्रों में रुक-रुक कर बारिश जारी रहेगी. उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में कांगड़ा, ऊना और आसपास के क्षेत्रों में भारी वर्षा दर्ज की गई है। अगले दो दिनों में कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला, सोलन और सिरमौर जिलों में भारी बारिश की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है.

कटियार ने कहा कि 11 जुलाई के आसपास मानसून की गतिविधियां फिर तेज हो सकती हैं. मौसम विभाग के अनुसार मध्य पर्वतीय जिलों—कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला और सिरमौर में 22 जुलाई तक मानसून काफी सक्रिय रहेगा, जबकि निचले और मैदानी क्षेत्रों में 16 जुलाई तक बारिश का असर अधिक रहने की संभावना है। इसके बाद 23 जुलाई से मानसून की गतिविधियों में कुछ कमी आ सकती है.

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में मानसून ने प्रदेश में भारी तबाही मचाई है. वर्ष 2023 में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में करीब 509 लोगों की मौत हुई थी, जबकि प्रदेश को करीब 12,000 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा था. वर्ष 2024 में आपदा का प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहा, लेकिन फिर भी बारिश और उससे जुड़ी घटनाओं में करीब 174 लोगों की जान गई. वहीं, वर्ष 2025 में एक बार फिर रिकॉर्ड बारिश, बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं ने भारी नुकसान पहुंचाया. 2025 में आई आपदा में लगभग 454 लोगों की मौत हुई.

प्रदेश में नई ड्रेनेज पॉलिसी लागू कीः विक्रमादित्य सिंह
लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि पिछले वर्षों में आई प्राकृतिक आपदाओं से सरकार ने महत्वपूर्ण सबक लिए हैं और इस बार नुकसान को न्यूनतम रखने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारी की गई है. उन्होंने बताया कि प्रदेश में नई ड्रेनेज पॉलिसी लागू की गई है, जिसके तहत नई सड़कों के निर्माण में केवल बॉक्स कलवर्ट बनाए जाएंगे ताकि मलबा जमा होने, जल निकासी बाधित होने और सड़कों व बागानों को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके. मंत्री ने कहा कि मानसून शुरू होने के साथ ही लोक निर्माण विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर है. विभाग के सचिव, इंजीनियर-इन-चीफ, सभी मुख्य अभियंताओं, जोनल अधिकारियों और अधीक्षण अभियंताओं के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक कर प्रदेशभर में मशीनरी, संसाधनों और संवेदनशील सड़कों की स्थिति की समीक्षा की गई है. जहां भी अतिरिक्त मशीनरी या संसाधनों की आवश्यकता होगी, वहां तत्काल तैनाती सुनिश्चित की जाएगी.

उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि किसी भी प्राकृतिक आपदा के दौरान आम लोगों को न्यूनतम परेशानी हो. हालांकि क्लाउडबर्स्ट और फ्लैश फ्लड जैसी घटनाओं को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन ऐसी स्थिति में सड़कें खोलने, यातायात बहाल करने और राहत कार्य शुरू करने के लिए मशीनरी तुरंत मौके पर भेजी जाएगी.

विक्रमादित्य सिंह ने बताया कि जिला उपायुक्तों, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के साथ लगातार समन्वय बनाए रखा जा रहा है. यदि पिछले तीन वर्षों जैसी गंभीर स्थिति दोबारा बनती है तो सभी एजेंसियां संयुक्त रूप से तेजी से राहत और बचाव कार्य करेंगी.

PM की ₹1500 करोड़ की घोषणा पर सरकार ने उठाए सवाल
लोक निर्माण मंत्री ने प्रधानमंत्री द्वारा हिमाचल के लिए घोषित ₹1500 करोड़ के विशेष पैकेज का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के धर्मशाला दौरे को लगभग एक वर्ष बीत चुका है और उस दौरान घोषित विशेष सहायता राशि अभी तक प्रदेश को प्राप्त नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि हिमाचल पहले से आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है. यदि घोषि

त सहायता समय पर मिल जाती तो आपदा प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण, सड़क बहाली और राहत कार्यों में बड़ी मदद मिलती. विक्रमादित्य सिंह ने भाजपा नेताओं पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जब वे केंद्रीय नेतृत्व और प्रधानमंत्री से मिलते हैं तो उन्हें राजनीतिक मुद्दों के बजाय हिमाचल के हितों को प्राथमिकता देते हुए ₹1500 करोड़ के पैकेज को जारी करवाने की मांग करनी चाहिए.

मौसम संबंधी अपडेट पर लगातार नजर बनाए रखें
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि भारी बारिश के दौरान भूस्खलन, मडस्लाइड, नदियों और खड्डों के जलस्तर में अचानक वृद्धि तथा सड़कें बंद होने जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं. लगातार बारिश से दृश्यता कम होने के कारण यात्रा भी जोखिम भरी हो सकती है। कृषि और बागवानी फसलों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई है. मौसम विभाग ने प्रदेशवासियों और पर्यटकों से अपील की है कि वे मौसम विभाग, राज्य सरकार और जिला प्रशासन द्वारा जारी एडवाइजरी का पालन करें. भारी बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें, नदी-नालों और संवेदनशील क्षेत्रों के पास न जाएं तथा मौसम संबंधी अपडेट पर लगातार नजर बनाए रखें.

सोमवार का दिन कैसा रहा?
बीते सोमवार को हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में रातभर भारी बारिश हुई, जिससे चंबा और कुल्लू जिलों में अचानक आई बाढ़ के कारण कई प्रमुख सड़कें बंद हो गईं. इस दौरान, एक वाहन पर पहाड़ी से टूटकर गिरे पत्थर की चपेट में आने से 14 वर्षीय एक लड़की की मौत हो गई. अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी. पुलिस ने बताया कि लड़की की पहचान कांगड़ा जिले के धर्मशाला की रहने वाली 14 वर्षीय दीक्षिता के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि वह चार अन्य लोगों के साथ यात्रा कर रही थी, तभी धगोड-बन्नी रोड पर एक चलती हुई गाड़ी पर पहाड़ी से टूटकर एक पत्थर आ गिरा, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई. पांच लोगों को लेकर जा रहा यह वाहन बन्नी माता मंदिर से लौट रहा था.

सैंज नदी में लगभग 50 क्यूमेक्स अतिरिक्त पानी छोड़ा जाएगा
अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में रातभर मध्यम से भारी बारिश हुई, जिससे चंबा और कुल्लू जिलों में बाढ़ आ गई और कई मुख्य सड़कें बंद हो गईं. अधिकारियों ने बताया कि चंबा जिले के चुराह उपमंडल में पंगोला नाले में अचानक आई बाढ़ के कारण चंबा-तीसा मार्ग बंद हो गया। वहीं, कुल्लू जिले के लारजी-सैंज मार्ग पर पागल नाले में बाढ़ आने से यातायात प्रभावित हुआ. बांध अधिकारियों ने बताया कि बांध के जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी और भारी पानी आने की संभावना को देखते हुए, कुल्लू जिले में स्थित पारबती जलविद्युत परियोजना-3 के बांध के द्वार से सैंज नदी में लगभग 50 क्यूमेक्स अतिरिक्त पानी छोड़ा जाएगा. अधिकारियों के अनुसार, मंडी जिले के जोगिंदरनगर में सबसे अधिक 97 मिलीमीटर (मिमी) बारिश दर्ज की गई. इसके बाद कांगड़ा में 74.8 मिमी, पालमपुर में 35.4 मिमी, भरवाईं में 34 मिमी, सराहन में 32.5 मिमी, रोहड़ू में 30 मिमी और धर्मशाला में 27.2 मिमी बारिश दर्ज की गई. मौसम विभाग ने सोमवार को बताया कि कांगड़ा, ऊना और सिरमौर जिलों में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं, चंबा, मंडी और शिमला जिलों में कुछ स्थानों पर भारी बारिश का अनुमान है. इसके साथ ही विभाग ने मंगलवार को कांगड़ा, मंडी, शिमला और सोलन में भारी से बहुत भारी बारिश के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ भी जारी किया है.