जयपुर। 3 जुलाई की शाम करीब 4:45 बजे नीरज अपने दिव्यांग बेटे को कोचिंग छोड़कर घर लौट रही थीं। तभी तेज रफ्तार एसयूवी ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। पुलिस के मुताबिक गाड़ी करीब 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही थी।
जिस मां ने पति की मौत के बाद टूटे हुए परिवार को संभालने की जिम्मेदारी उठाई, उसी मां की मौत की साजिश उसके सबसे करीबी रिश्ते ने रच दी। पुलिस जांच में सामने आई कहानी किसी क्राइम थ्रिलर से कम नहीं है। आरोप है कि 23 वर्षीय आयुषी ने अपनी विधवा मां नीरज शर्मा की हत्या सिर्फ इसलिए करवा दी ताकि उसे मां की संपत्ति मिल जाए और अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल हो सके।
तीन महीने तक रची गई मौत की पटकथा
पुलिस के मुताबिक यह हत्या किसी गुस्से या अचानक हुए विवाद का नतीजा नहीं थी। इसके पीछे करीब तीन महीने तक चली सुनियोजित साजिश थी। हर कदम बेहद सोच-समझकर उठाया गया। लोगों को जोड़ा गया, गाड़ी का इंतजाम हुआ और पूरी कोशिश की गई कि हत्या को सड़क हादसा साबित किया जा सके।
पिता की मौत के बाद नौकरी बनी लालच की वजह
जांच में सामने आया कि नीरज शर्मा के पति विजय कुमार शर्मा अदालत में एलडीसी थे। करीब एक साल पहले उनकी मौत के बाद परिवार आर्थिक संकट में आ गया था। अनुकंपा के आधार पर नीरज को सरकारी नौकरी मिली ताकि परिवार का गुजारा चल सके। लेकिन पुलिस का दावा है कि यही नौकरी बेटी आयुषी की सबसे बड़ी चाहत बन गई।
सरकारी नौकरी और प्रॉपर्टी पर थी नजर
पुलिस अधिकारियों के अनुसार आयुषी को लगता था कि अगर उसकी मां की मौत हो जाएगी तो सरकारी नौकरी उसके हिस्से आ सकती है। इसके साथ ही मां के नाम की संपत्ति भी उसे मिल जाएगी। इसी लालच ने उसे उस रास्ते पर पहुंचा दिया, जहां मां-बेटी का रिश्ता भी मायने नहीं रखता था।
चाचा और चचेरे भाई के साथ बनाई साजिश
आरोप है कि आयुषी ने अपने चाचा मोहन स्वरूप और चचेरे भाई बलराम उर्फ रवि के साथ मिलकर हत्या की योजना बनाई। पहले कई तरीके सोचे गए, लेकिन आखिर में फैसला हुआ कि नीरज की हत्या को सड़क दुर्घटना का रूप दिया जाएगा। शुरुआत में किराए की एसयूवी से कोशिश की गई, लेकिन योजना सफल नहीं हुई। इसके बाद दूसरी गाड़ी का इंतजाम किया गया और कई दिनों तक नीरज की हर गतिविधि पर नजर रखी जाती रही।
सात लाख की सुपारी देकर बुलाया कातिल
पुलिस के अनुसार हत्या को अंजाम देने के लिए भरतपुर के बयाना निवासी हेमंत शर्मा से सात लाख रुपये में सौदा किया गया। हेमंत ने अपने चार साथियों को भी इस वारदात में शामिल कर लिया। पूरी टीम को सिर्फ एक जिम्मेदारी दी गई थी कि नीरज की मौत ऐसी दिखनी चाहिए, जैसे वह तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आई हों।
130 की स्पीड से मारी टक्कर
3 जुलाई की शाम करीब 4:45 बजे नीरज अपने दिव्यांग बेटे को कोचिंग छोड़कर घर लौट रही थीं। तभी तेज रफ्तार एसयूवी ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। पुलिस के मुताबिक गाड़ी करीब 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही थी। टक्कर इतनी भीषण थी कि नीरज करीब 100 फीट दूर जाकर गिरीं और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। चालक वाहन लेकर तुरंत फरार हो गया।
भाई की शिकायत से खुली साजिश की परतें
शुरुआत में मामला हिट एंड रन का लग रहा था, लेकिन नीरज के भाई राकेश शर्मा ने पुलिस को शिकायत देकर साफ कहा कि उनकी बहन की हत्या हुई है। उन्होंने बताया कि नीरज कई बार कह चुकी थीं कि बेटी आयुषी, सास और भतीजा बलराम लगातार संपत्ति को लेकर उन्हें प्रताड़ित कर रहे हैं।
मां को पहले ही था अपनी मौत का डर
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि नीरज ने अपने भाई से कहा था कि आयुषी का व्यवहार लगातार हिंसक होता जा रहा है। उन्हें आशंका थी कि कभी भी उनके साथ कोई बड़ी घटना हो सकती है। यही बयान बाद में जांच का सबसे अहम आधार बना।
सीसीटीवी और कॉल डिटेल ने खोला राज
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड और आरोपियों की गतिविधियों का विश्लेषण किया। जांच आगे बढ़ी तो पूरा षड्यंत्र सामने आ गया। पुलिस ने आयुषी, उसके चाचा मोहन स्वरूप, कथित सुपारी किलर हेमंत शर्मा और उसके चार साथियों को गिरफ्तार कर लिया। जबकि चचेरा भाई बलराम उर्फ रवि अभी फरार है। हत्या में इस्तेमाल की गई एसयूवी भी बरामद कर ली गई है।
रिश्तों से बड़ा निकला लालच
यह मामला सिर्फ एक हत्या का नहीं, बल्कि रिश्तों के टूटते भरोसे की भयावह तस्वीर भी सामने लाता है। जिस मां ने पति की मौत के बाद परिवार को संभालने के लिए नौकरी की, उसी नौकरी और संपत्ति के लालच में उसकी हत्या की साजिश रचे जाने का आरोप है। पुलिस अब फरार आरोपी की तलाश के साथ पूरे षड्यंत्र के अन्य पहलुओं की जांच में जुटी है।